25 सितंबर 2082 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 25 सितंबर 2082, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 25 सितंबर 2082 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (01:31, 26 सित॰ तक), नक्षत्र स्वाति (15:29 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 06:11 पर और सूर्यास्त 18:13 पर है। राहुकाल 10:42 से 12:12 तक है।

दिन और रात
दिन 06:11 – 18:13
रात 06:11 तक
तिथि
चतुर्थी, 01:31 तक
पंचमी
नक्षत्र
स्वाति, 15:29 तक
विशाखा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 सितंबर 2082 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 01:31, 26 सित॰ तक
शुक्ल पंचमी 22:40, 26 सित॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 15:29 तक
विशाखा 13:12, 26 सित॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 18:51 तक
विष्कंभअशुभ 15:15, 26 सित॰ तक
करण
वणिज 15:07 तक
विष्टि (भद्रा) 01:31, 26 सित॰ तक
बव 12:02, 26 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:11
सूर्यास्त
18:13
चंद्रोदय
09:18
चंद्रास्त
20:05
दिनमान
12h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2139
शक संवत
2004, शुभकृत संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:35 – 05:23
अभिजीत मुहूर्त
11:48 – 12:36

अशुभ समय

राहुकाल
10:42 – 12:12
यमगंड
15:13 – 16:43
गुलिक काल
07:41 – 09:11

25 सितंबर 2082 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:11 – 07:41सामान्य
लाभ07:41 – 09:11शुभ
अमृत09:11 – 10:42शुभ
काल10:42 – 12:12टालें
शुभ12:12 – 13:42शुभ
रोग13:42 – 15:13टालें
उद्वेग15:13 – 16:43टालें
चर16:43 – 18:13सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:13 – 19:43टालें
काल19:43 – 21:13टालें
लाभ21:13 – 22:43शुभ
उद्वेग22:43 – 00:12टालें
शुभ00:12 – 01:42शुभ
अमृत01:42 – 03:12शुभ
चर03:12 – 04:41सामान्य
रोग04:41 – 06:11टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:1107:11दिन
बुध07:1108:11दिन
चंद्र08:1109:11दिन
शनि09:1110:12दिन
गुरु10:1211:12दिन
मंगल11:1212:12दिन
सूर्य12:1213:12दिन
शुक्र13:1214:13दिन
बुध14:1315:13दिन
चंद्र15:1316:13दिन
शनि16:1317:13दिन
गुरु17:1318:13दिन
मंगल18:1319:13रात
सूर्य19:1320:13रात
शुक्र20:1321:13रात
बुध21:1322:13रात
चंद्र22:1323:13रात
शनि23:1300:12रात
गुरु00:1201:12रात
मंगल01:1202:12रात
सूर्य02:1203:12रात
शुक्र03:1204:12रात
बुध04:1205:11रात
चंद्र05:1106:11रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 सित॰ 2082विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 अक्टू॰ 2082शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 अक्टू॰ 2082प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 अक्टू॰ 2082आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
11 अक्टू॰ 2082संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 अक्टू॰ 2082कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
18 अक्टू॰ 2082कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
18 अक्टू॰ 2082तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
20 अक्टू॰ 2082प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2082कार्तिक अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 25.0129° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।