22 दिसंबर 2087 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 22 दिसंबर 2087, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 22 दिसंबर 2087 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (02:23, 23 दिस॰ तक), नक्षत्र विशाखा (08:29 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 07:09 पर और सूर्यास्त 17:29 पर है। राहुकाल 08:27 से 09:44 तक है।

दिन और रात
दिन 07:09 – 17:29
रात 07:10 तक
तिथि
त्रयोदशी, 02:23 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
अनुराधा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 दिसंबर 2087 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 02:23, 23 दिस॰ तक
कृष्ण चतुर्दशी 04:57, 24 दिस॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 08:29 तक
अनुराधा 11:35, 23 दिस॰ तक
योग
धृति 23:24 तक
शूलअशुभ 00:17, 24 दिस॰ तक
करण
गर 13:01 तक
वणिज 02:23, 23 दिस॰ तक
विष्टि (भद्रा) 15:42, 23 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:09
सूर्यास्त
17:29
चंद्रोदय
04:38
चंद्रास्त
15:32
दिनमान
10h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2144
शक संवत
2009, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:20 – 06:15
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:40

अशुभ समय

राहुकाल
08:27 – 09:44
यमगंड
11:02 – 12:19
गुलिक काल
13:37 – 14:54

22 दिसंबर 2087 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:09 – 08:27शुभ
काल08:27 – 09:44टालें
शुभ09:44 – 11:02शुभ
रोग11:02 – 12:19टालें
उद्वेग12:19 – 13:37टालें
चर13:37 – 14:54सामान्य
लाभ14:54 – 16:11शुभ
अमृत16:11 – 17:29शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:29 – 19:11सामान्य
रोग19:11 – 20:54टालें
काल20:54 – 22:37टालें
लाभ22:37 – 00:19शुभ
उद्वेग00:19 – 02:02टालें
शुभ02:02 – 03:45शुभ
अमृत03:45 – 05:27शुभ
चर05:27 – 07:10सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:0908:01दिन
शनि08:0108:53दिन
गुरु08:5309:44दिन
मंगल09:4410:36दिन
सूर्य10:3611:27दिन
शुक्र11:2712:19दिन
बुध12:1913:11दिन
चंद्र13:1114:02दिन
शनि14:0214:54दिन
गुरु14:5415:46दिन
मंगल15:4616:37दिन
सूर्य16:3717:29दिन
शुक्र17:2918:37रात
बुध18:3719:46रात
चंद्र19:4620:54रात
शनि20:5422:02रात
गुरु22:0223:11रात
मंगल23:1100:19रात
सूर्य00:1901:28रात
शुक्र01:2802:36रात
बुध02:3603:45रात
चंद्र03:4504:53रात
शनि04:5306:01रात
गुरु06:0107:10रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 दिस॰ 2087प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 दिस॰ 2087पौष अमावस्याअमावस्या
29 दिस॰ 2087विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
4 जन॰ 2088शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
6 जन॰ 2088प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
8 जन॰ 2088पौष पूर्णिमापूर्णिमा
11 जन॰ 2088संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जन॰ 2088मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2088कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
19 जन॰ 2088कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 25.0862° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।