28 मार्च 2099 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 28 मार्च 2099, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 28 मार्च 2099 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (12:13 तक), नक्षत्र रोहिणी (09:46 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 06:15 पर और सूर्यास्त 18:36 पर है। राहुकाल 09:21 से 10:53 तक है।

दिन और रात
दिन 06:15 – 18:36
रात 06:14 तक
तिथि
षष्ठी, 12:13 तक
सप्तमी
नक्षत्र
रोहिणी, 09:46 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 मार्च 2099 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 12:13 तक
शुक्ल सप्तमी 11:40, 29 मार्च तक
नक्षत्र
रोहिणी 09:46 तक
मृगशिरा 09:56, 29 मार्च तक
योग
आयुष्मान 16:44 तक
सौभाग्य 15:05, 29 मार्च तक
करण
तैतिल 12:13 तक
गर 00:01, 29 मार्च तक
वणिज 11:40, 29 मार्च तक
चंद्र राशि
वृषभ 21:56 तक
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:15
सूर्यास्त
18:36
चंद्रोदय
09:59
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
12h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2156
शक संवत
2021, सिद्धार्थी संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:42 – 05:29
अभिजीत मुहूर्त
12:01 – 12:51

अशुभ समय

राहुकाल
09:21 – 10:53
यमगंड
13:59 – 15:31
गुलिक काल
06:15 – 07:48

28 मार्च 2099 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:15 – 07:48टालें
शुभ07:48 – 09:21शुभ
रोग09:21 – 10:53टालें
उद्वेग10:53 – 12:26टालें
चर12:26 – 13:59सामान्य
लाभ13:59 – 15:31शुभ
अमृत15:31 – 17:04शुभ
काल17:04 – 18:36टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:36 – 20:04शुभ
उद्वेग20:04 – 21:31टालें
शुभ21:31 – 22:58शुभ
अमृत22:58 – 00:25शुभ
चर00:25 – 01:53सामान्य
रोग01:53 – 03:20टालें
काल03:20 – 04:47टालें
लाभ04:47 – 06:14शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:1507:17दिन
गुरु07:1708:19दिन
मंगल08:1909:21दिन
सूर्य09:2110:22दिन
शुक्र10:2211:24दिन
बुध11:2412:26दिन
चंद्र12:2613:28दिन
शनि13:2814:29दिन
गुरु14:2915:31दिन
मंगल15:3116:33दिन
सूर्य16:3317:35दिन
शुक्र17:3518:36दिन
बुध18:3619:35रात
चंद्र19:3520:33रात
शनि20:3321:31रात
गुरु21:3122:29रात
मंगल22:2923:27रात
सूर्य23:2700:25रात
शुक्र00:2501:23रात
बुध01:2302:22रात
चंद्र02:2203:20रात
शनि03:2004:18रात
गुरु04:1805:16रात
मंगल05:1606:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 अप्रैल 2099शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 अप्रैल 2099प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 अप्रैल 2099चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
8 अप्रैल 2099संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 अप्रैल 2099कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 अप्रैल 2099मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
16 अप्रैल 2099कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
18 अप्रैल 2099प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 अप्रैल 2099वैशाख अमावस्याअमावस्या
24 अप्रैल 2099विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 25.2436° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।