14 नवंबर 2001 को पटना का पंचांग

बुधवार, 14 नवंबर 2001, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 14 नवंबर 2001 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (14:07 तक), नक्षत्र स्वाति (20:37 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 06:06 पर और सूर्यास्त 17:01 पर है। राहुकाल 11:33 से 12:55 तक है।

दिन और रात
दिन 06:06 – 17:01
रात 06:06 तक
तिथि
चतुर्दशी, 14:07 तक
अमावस्या
नक्षत्र
स्वाति, 20:37 तक
विशाखा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 नवंबर 2001 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 14:07 तक
अमावस्या 12:09, 15 नव॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 20:37 तक
विशाखा 19:30, 15 नव॰ तक
योग
आयुष्मान 07:19 तक
सौभाग्य 04:25, 15 नव॰ तक
शोभन 01:53, 16 नव॰ तक
करण
शकुनि 14:07 तक
चतुष्पद 01:05, 15 नव॰ तक
नाग 12:09, 15 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:06
सूर्यास्त
17:01
चंद्रोदय
04:49
चंद्रास्त
16:32
दिनमान
10h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2058
शक संवत
1923, वृष संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:21 – 05:13
अभिजीत मुहूर्त
11:11 – 11:55 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:33 – 12:55
यमगंड
07:28 – 08:49
गुलिक काल
10:11 – 11:33

14 नवंबर 2001 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:06 – 07:28शुभ
अमृत07:28 – 08:49शुभ
काल08:49 – 10:11टालें
शुभ10:11 – 11:33शुभ
रोग11:33 – 12:55टालें
उद्वेग12:55 – 14:17टालें
चर14:17 – 15:39सामान्य
लाभ15:39 – 17:01शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:01 – 18:39टालें
शुभ18:39 – 20:17शुभ
अमृत20:17 – 21:55शुभ
चर21:55 – 23:34सामान्य
रोग23:34 – 01:12टालें
काल01:12 – 02:50टालें
लाभ02:50 – 04:28शुभ
उद्वेग04:28 – 06:06टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:0607:00दिन
चंद्र07:0007:55दिन
शनि07:5508:49दिन
गुरु08:4909:44दिन
मंगल09:4410:39दिन
सूर्य10:3911:33दिन
शुक्र11:3312:28दिन
बुध12:2813:22दिन
चंद्र13:2214:17दिन
शनि14:1715:12दिन
गुरु15:1216:06दिन
मंगल16:0617:01दिन
सूर्य17:0118:06रात
शुक्र18:0619:12रात
बुध19:1220:17रात
चंद्र20:1721:23रात
शनि21:2322:28रात
गुरु22:2823:34रात
मंगल23:3400:39रात
सूर्य00:3901:45रात
शुक्र01:4502:50रात
बुध02:5003:55रात
चंद्र03:5505:01रात
शनि05:0106:06रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 नव॰ 2001कार्तिक अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2001वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
19 नव॰ 2001विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 नव॰ 2001शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 नव॰ 2001प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 नव॰ 2001कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
4 दिस॰ 2001संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 दिस॰ 2001कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 दिस॰ 2001कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 दिस॰ 2001प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8832° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।