3 नवंबर 2002 को पटना का पंचांग

रविवार, 3 नवंबर 2002, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 3 नवंबर 2002 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (09:23 तक), नक्षत्र हस्त (10:27 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 05:58 पर और सूर्यास्त 17:07 पर है। राहुकाल 15:43 से 17:07 तक है।

दिन और रात
दिन 05:58 – 17:07
रात 05:59 तक
तिथि
त्रयोदशी, 09:23 तक
चतुर्दशी, 05:43 तक
नक्षत्र
हस्त, 10:27 तक
चित्रा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 नवंबर 2002 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 09:23 तक
कृष्ण चतुर्दशी 05:43, 4 नव॰ तक
अमावस्या 02:04, 5 नव॰ तक
नक्षत्र
हस्त 10:27 तक
चित्रा 07:33, 4 नव॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 15:21 तक
प्रीति 11:08, 4 नव॰ तक
करण
वणिज 09:23 तक
विष्टि (भद्रा) 19:33 तक
शकुनि 05:43, 4 नव॰ तक
चतुष्पद 15:52, 4 नव॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 21:00 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:58
सूर्यास्त
17:07
चंद्रोदय
03:59
चंद्रास्त
16:12
दिनमान
11h 9m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2059
शक संवत
1924, चित्रभानु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:15 – 05:07
अभिजीत मुहूर्त
11:10 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
15:43 – 17:07
यमगंड
11:32 – 12:56
गुलिक काल
14:20 – 15:43

3 नवंबर 2002 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:58 – 07:22टालें
चर07:22 – 08:45सामान्य
लाभ08:45 – 10:09शुभ
अमृत10:09 – 11:32शुभ
काल11:32 – 12:56टालें
शुभ12:56 – 14:20शुभ
रोग14:20 – 15:43टालें
उद्वेग15:43 – 17:07टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:07 – 18:43शुभ
अमृत18:43 – 20:20शुभ
चर20:20 – 21:56सामान्य
रोग21:56 – 23:33टालें
काल23:33 – 01:09टालें
लाभ01:09 – 02:46शुभ
उद्वेग02:46 – 04:22टालें
शुभ04:22 – 05:59शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:5806:54दिन
शुक्र06:5407:49दिन
बुध07:4908:45दिन
चंद्र08:4509:41दिन
शनि09:4110:37दिन
गुरु10:3711:32दिन
मंगल11:3212:28दिन
सूर्य12:2813:24दिन
शुक्र13:2414:20दिन
बुध14:2015:15दिन
चंद्र15:1516:11दिन
शनि16:1117:07दिन
गुरु17:0718:11रात
मंगल18:1119:15रात
सूर्य19:1520:20रात
शुक्र20:2021:24रात
बुध21:2422:28रात
चंद्र22:2823:33रात
शनि23:3300:37रात
गुरु00:3701:41रात
मंगल01:4102:46रात
सूर्य02:4603:50रात
शुक्र03:5004:54रात
बुध04:5405:59रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 नव॰ 2002प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 नव॰ 2002कार्तिक अमावस्याअमावस्या
8 नव॰ 2002विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 नव॰ 2002शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2002वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2002प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
19 नव॰ 2002कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
24 नव॰ 2002संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 नव॰ 2002कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
30 नव॰ 2002कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 दिस॰ 2002प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8967° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।