25 नवंबर 2002 को पटना का पंचांग

सोमवार, 25 नवंबर 2002, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 25 नवंबर 2002 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (11:35 तक), नक्षत्र पुष्य (01:41, 26 नव॰ तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:13 पर और सूर्यास्त 16:58 पर है। राहुकाल 07:34 से 08:55 तक है।

दिन और रात
दिन 06:13 – 16:58
रात 06:14 तक
तिथि
पंचमी, 11:35 तक
षष्ठी
नक्षत्र
पुष्य, 01:41 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 नवंबर 2002 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 11:35 तक
कृष्ण षष्ठी 11:03, 26 नव॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 01:41, 26 नव॰ तक
आश्लेषा 01:28, 27 नव॰ तक
योग
शुक्ल 15:20 तक
ब्रह्म 13:39, 26 नव॰ तक
करण
तैतिल 11:35 तक
गर 23:23 तक
वणिज 11:03, 26 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:13
सूर्यास्त
16:58
चंद्रोदय
21:34
चंद्रास्त
10:44
दिनमान
10h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2059
शक संवत
1924, चित्रभानु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:27 – 05:20
अभिजीत मुहूर्त
11:14 – 11:57

अशुभ समय

राहुकाल
07:34 – 08:55
यमगंड
10:15 – 11:36
गुलिक काल
12:56 – 14:17

25 नवंबर 2002 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:13 – 07:34शुभ
काल07:34 – 08:55टालें
शुभ08:55 – 10:15शुभ
रोग10:15 – 11:36टालें
उद्वेग11:36 – 12:56टालें
चर12:56 – 14:17सामान्य
लाभ14:17 – 15:37शुभ
अमृत15:37 – 16:58शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर16:58 – 18:38सामान्य
रोग18:38 – 20:17टालें
काल20:17 – 21:57टालें
लाभ21:57 – 23:36शुभ
उद्वेग23:36 – 01:16टालें
शुभ01:16 – 02:55शुभ
अमृत02:55 – 04:35शुभ
चर04:35 – 06:14सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:1307:07दिन
शनि07:0708:01दिन
गुरु08:0108:55दिन
मंगल08:5509:48दिन
सूर्य09:4810:42दिन
शुक्र10:4211:36दिन
बुध11:3612:29दिन
चंद्र12:2913:23दिन
शनि13:2314:17दिन
गुरु14:1715:11दिन
मंगल15:1116:04दिन
सूर्य16:0416:58दिन
शुक्र16:5818:04रात
बुध18:0419:11रात
चंद्र19:1120:17रात
शनि20:1721:23रात
गुरु21:2322:30रात
मंगल22:3023:36रात
सूर्य23:3600:42रात
शुक्र00:4201:49रात
बुध01:4902:55रात
चंद्र02:5504:01रात
शनि04:0105:08रात
गुरु05:0806:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
28 नव॰ 2002कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
30 नव॰ 2002कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 दिस॰ 2002प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 दिस॰ 2002मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
7 दिस॰ 2002विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 दिस॰ 2002शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 दिस॰ 2002धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2002प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
19 दिस॰ 2002मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
23 दिस॰ 2002संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8975° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।