21 अक्टूबर 2003 को पटना का पंचांग

मंगलवार, 21 अक्टूबर 2003, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 21 अक्टूबर 2003 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (06:33 तक), नक्षत्र मघा (00:15, 22 अक्टू॰ तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 05:50 पर और सूर्यास्त 17:17 पर है। राहुकाल 14:25 से 15:51 तक है।

दिन और रात
दिन 05:50 – 17:17
रात 05:51 तक
तिथि
एकादशी, 05:20 तक
नक्षत्र
मघा, 00:15 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 अक्टूबर 2003 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण दशमी 06:33 तक
कृष्ण एकादशी 05:20, 22 अक्टू॰ तक
कृष्ण द्वादशी 03:22, 23 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मघा 00:15, 22 अक्टू॰ तक
पूर्वा फाल्गुनी 23:09, 22 अक्टू॰ तक
योग
शुभ 06:38 तक
शुक्ल 04:30, 22 अक्टू॰ तक
ब्रह्म 01:47, 23 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 06:33 तक
बव 18:03 तक
बालव 05:20, 22 अक्टू॰ तक
कौलव 16:27, 22 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:50
सूर्यास्त
17:17
चंद्रोदय
01:11
चंद्रास्त
14:44
दिनमान
11h 26m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2060
शक संवत
1925, स्वभानु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:10 – 05:00
अभिजीत मुहूर्त
11:11 – 11:56

अशुभ समय

राहुकाल
14:25 – 15:51
यमगंड
08:42 – 10:08
गुलिक काल
11:34 – 12:59

21 अक्टूबर 2003 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:50 – 07:16टालें
उद्वेग07:16 – 08:42टालें
चर08:42 – 10:08सामान्य
लाभ10:08 – 11:34शुभ
अमृत11:34 – 12:59शुभ
काल12:59 – 14:25टालें
शुभ14:25 – 15:51शुभ
रोग15:51 – 17:17टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:17 – 18:51टालें
लाभ18:51 – 20:25शुभ
उद्वेग20:25 – 22:00टालें
शुभ22:00 – 23:34शुभ
अमृत23:34 – 01:08शुभ
चर01:08 – 02:42सामान्य
रोग02:42 – 04:17टालें
काल04:17 – 05:51टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:5006:47दिन
सूर्य06:4707:45दिन
शुक्र07:4508:42दिन
बुध08:4209:39दिन
चंद्र09:3910:36दिन
शनि10:3611:34दिन
गुरु11:3412:31दिन
मंगल12:3113:28दिन
सूर्य13:2814:25दिन
शुक्र14:2515:22दिन
बुध15:2216:20दिन
चंद्र16:2017:17दिन
शनि17:1718:20रात
गुरु18:2019:22रात
मंगल19:2220:25रात
सूर्य20:2521:28रात
शुक्र21:2822:31रात
बुध22:3123:34रात
चंद्र23:3400:37रात
शनि00:3701:39रात
गुरु01:3902:42रात
मंगल02:4203:45रात
सूर्य03:4504:48रात
शुक्र04:4805:51रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 अक्टू॰ 2003कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 अक्टू॰ 2003प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 अक्टू॰ 2003कार्तिक अमावस्याअमावस्या
28 अक्टू॰ 2003विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
4 नव॰ 2003शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
6 नव॰ 2003प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
8 नव॰ 2003कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
13 नव॰ 2003संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 नव॰ 2003वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2003कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9102° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।