20 अक्टूबर 2003 को पटना का पंचांग

सोमवार, 20 अक्टूबर 2003, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 20 अक्टूबर 2003 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (06:58 तक), नक्षत्र आश्लेषा (00:36, 21 अक्टू॰ तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 05:50 पर और सूर्यास्त 17:18 पर है। राहुकाल 07:16 से 08:42 तक है।

दिन और रात
दिन 05:50 – 17:18
रात 05:50 तक
तिथि
दशमी
नक्षत्र
आश्लेषा, 00:36 तक
मघा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 अक्टूबर 2003 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण नवमी 06:58 तक
कृष्ण दशमी 06:33, 21 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
आश्लेषा 00:36, 21 अक्टू॰ तक
मघा 00:15, 22 अक्टू॰ तक
योग
साध्य 08:06 तक
शुभ 06:38, 21 अक्टू॰ तक
करण
गर 06:58 तक
वणिज 18:52 तक
विष्टि (भद्रा) 06:33, 21 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 00:36, 21 अक्टू॰ तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:50
सूर्यास्त
17:18
चंद्रोदय
00:11
चंद्रास्त
14:05
दिनमान
11h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2060
शक संवत
1925, स्वभानु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:10 – 05:00
अभिजीत मुहूर्त
11:11 – 11:57

अशुभ समय

राहुकाल
07:16 – 08:42
यमगंड
10:08 – 11:34
गुलिक काल
13:00 – 14:26

20 अक्टूबर 2003 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:50 – 07:16शुभ
काल07:16 – 08:42टालें
शुभ08:42 – 10:08शुभ
रोग10:08 – 11:34टालें
उद्वेग11:34 – 13:00टालें
चर13:00 – 14:26सामान्य
लाभ14:26 – 15:52शुभ
अमृत15:52 – 17:18शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:18 – 18:52सामान्य
रोग18:52 – 20:26टालें
काल20:26 – 22:00टालें
लाभ22:00 – 23:34शुभ
उद्वेग23:34 – 01:08टालें
शुभ01:08 – 02:42शुभ
अमृत02:42 – 04:16शुभ
चर04:16 – 05:50सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:5006:47दिन
शनि06:4707:44दिन
गुरु07:4408:42दिन
मंगल08:4209:39दिन
सूर्य09:3910:36दिन
शुक्र10:3611:34दिन
बुध11:3412:31दिन
चंद्र12:3113:28दिन
शनि13:2814:26दिन
गुरु14:2615:23दिन
मंगल15:2316:20दिन
सूर्य16:2017:18दिन
शुक्र17:1818:20रात
बुध18:2019:23रात
चंद्र19:2320:26रात
शनि20:2621:29रात
गुरु21:2922:31रात
मंगल22:3123:34रात
सूर्य23:3400:37रात
शुक्र00:3701:39रात
बुध01:3902:42रात
चंद्र02:4203:45रात
शनि03:4504:48रात
गुरु04:4805:50रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 अक्टू॰ 2003कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 अक्टू॰ 2003प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 अक्टू॰ 2003कार्तिक अमावस्याअमावस्या
28 अक्टू॰ 2003विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
4 नव॰ 2003शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
6 नव॰ 2003प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
8 नव॰ 2003कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
13 नव॰ 2003संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 नव॰ 2003वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2003कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9101° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।