19 अक्टूबर 2003 को पटना का पंचांग

रविवार, 19 अक्टूबर 2003, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 19 अक्टूबर 2003 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (06:32 तक), नक्षत्र पुष्य (00:09, 20 अक्टू॰ तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 05:49 पर और सूर्यास्त 17:19 पर है। राहुकाल 15:52 से 17:19 तक है।

दिन और रात
दिन 05:49 – 17:19
रात 05:50 तक
तिथि
नवमी
नक्षत्र
पुष्य, 00:09 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 अक्टूबर 2003 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 06:32 तक
कृष्ण नवमी 06:58, 20 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 00:09, 20 अक्टू॰ तक
आश्लेषा 00:36, 21 अक्टू॰ तक
योग
सिद्ध 08:55 तक
साध्य 08:06, 20 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 06:32 तक
तैतिल 18:51 तक
गर 06:58, 20 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:49
सूर्यास्त
17:19
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
13:22
दिनमान
11h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2060
शक संवत
1925, स्वभानु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:09 – 04:59
अभिजीत मुहूर्त
11:11 – 11:57

अशुभ समय

राहुकाल
15:52 – 17:19
यमगंड
11:34 – 13:00
गुलिक काल
14:26 – 15:52

19 अक्टूबर 2003 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:49 – 07:15टालें
चर07:15 – 08:42सामान्य
लाभ08:42 – 10:08शुभ
अमृत10:08 – 11:34शुभ
काल11:34 – 13:00टालें
शुभ13:00 – 14:26शुभ
रोग14:26 – 15:52टालें
उद्वेग15:52 – 17:19टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:19 – 18:52शुभ
अमृत18:52 – 20:26शुभ
चर20:26 – 22:00सामान्य
रोग22:00 – 23:34टालें
काल23:34 – 01:08टालें
लाभ01:08 – 02:42शुभ
उद्वेग02:42 – 04:16टालें
शुभ04:16 – 05:50शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:4906:47दिन
शुक्र06:4707:44दिन
बुध07:4408:42दिन
चंद्र08:4209:39दिन
शनि09:3910:36दिन
गुरु10:3611:34दिन
मंगल11:3412:31दिन
सूर्य12:3113:29दिन
शुक्र13:2914:26दिन
बुध14:2615:24दिन
चंद्र15:2416:21दिन
शनि16:2117:19दिन
गुरु17:1918:21रात
मंगल18:2119:24रात
सूर्य19:2420:26रात
शुक्र20:2621:29रात
बुध21:2922:32रात
चंद्र22:3223:34रात
शनि23:3400:37रात
गुरु00:3701:39रात
मंगल01:3902:42रात
सूर्य02:4203:45रात
शुक्र03:4504:47रात
बुध04:4705:50रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 अक्टू॰ 2003कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 अक्टू॰ 2003प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 अक्टू॰ 2003कार्तिक अमावस्याअमावस्या
28 अक्टू॰ 2003विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
4 नव॰ 2003शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
6 नव॰ 2003प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
8 नव॰ 2003कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
13 नव॰ 2003संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 नव॰ 2003वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2003कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9101° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।