26 अक्टूबर 2003 को पटना का पंचांग

रविवार, 26 अक्टूबर 2003, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 26 अक्टूबर 2003 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (14:47 तक), नक्षत्र स्वाति (13:46 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:53 पर और सूर्यास्त 17:13 पर है। राहुकाल 15:48 से 17:13 तक है।

दिन और रात
दिन 05:53 – 17:13
रात 05:54 तक
तिथि
प्रतिपदा, 14:47 तक
द्वितीया
नक्षत्र
स्वाति, 13:46 तक
विशाखा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 अक्टूबर 2003 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 14:47 तक
शुक्ल द्वितीया 11:14, 27 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 13:46 तक
विशाखा 11:00, 27 अक्टू॰ तक
योग
प्रीति 10:54 तक
आयुष्मान 06:48, 27 अक्टू॰ तक
करण
बव 14:47 तक
बालव 01:00, 27 अक्टू॰ तक
कौलव 11:14, 27 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
तुला 05:41, 27 अक्टू॰ तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:53
सूर्यास्त
17:13
चंद्रोदय
06:29
चंद्रास्त
17:54
दिनमान
11h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2060
शक संवत
1925, स्वभानु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:12 – 05:02
अभिजीत मुहूर्त
11:10 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
15:48 – 17:13
यमगंड
11:33 – 12:58
गुलिक काल
14:23 – 15:48

26 अक्टूबर 2003 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:53 – 07:18टालें
चर07:18 – 08:43सामान्य
लाभ08:43 – 10:08शुभ
अमृत10:08 – 11:33शुभ
काल11:33 – 12:58टालें
शुभ12:58 – 14:23शुभ
रोग14:23 – 15:48टालें
उद्वेग15:48 – 17:13टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:13 – 18:48शुभ
अमृत18:48 – 20:23शुभ
चर20:23 – 21:58सामान्य
रोग21:58 – 23:33टालें
काल23:33 – 01:08टालें
लाभ01:08 – 02:43शुभ
उद्वेग02:43 – 04:19टालें
शुभ04:19 – 05:54शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:5306:50दिन
शुक्र06:5007:46दिन
बुध07:4608:43दिन
चंद्र08:4309:40दिन
शनि09:4010:36दिन
गुरु10:3611:33दिन
मंगल11:3312:29दिन
सूर्य12:2913:26दिन
शुक्र13:2614:23दिन
बुध14:2315:19दिन
चंद्र15:1916:16दिन
शनि16:1617:13दिन
गुरु17:1318:16रात
मंगल18:1619:19रात
सूर्य19:1920:23रात
शुक्र20:2321:26रात
बुध21:2622:30रात
चंद्र22:3023:33रात
शनि23:3300:37रात
गुरु00:3701:40रात
मंगल01:4002:43रात
सूर्य02:4303:47रात
शुक्र03:4704:50रात
बुध04:5005:54रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
28 अक्टू॰ 2003विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
4 नव॰ 2003शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
6 नव॰ 2003प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
8 नव॰ 2003कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
13 नव॰ 2003संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 नव॰ 2003वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2003कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 नव॰ 2003कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 नव॰ 2003प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
23 नव॰ 2003मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9103° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।