3 नवंबर 2005 को पटना का पंचांग

गुरुवार, 3 नवंबर 2005, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 3 नवंबर 2005 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (06:24 तक), नक्षत्र विशाखा (14:34 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 05:58 पर और सूर्यास्त 17:07 पर है। राहुकाल 12:56 से 14:19 तक है।

दिन और रात
दिन 05:58 – 17:07
रात 05:59 तक
तिथि
द्वितीया, 05:26 तक
नक्षत्र
विशाखा, 14:34 तक
अनुराधा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 नवंबर 2005 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 06:24 तक
शुक्ल द्वितीया 05:26, 4 नव॰ तक
शुक्ल तृतीया 04:05, 5 नव॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 14:34 तक
अनुराधा 14:06, 4 नव॰ तक
योग
सौभाग्य 19:21 तक
शोभन 17:13, 4 नव॰ तक
करण
बव 06:24 तक
बालव 17:58 तक
कौलव 05:26, 4 नव॰ तक
तैतिल 16:48, 4 नव॰ तक
चंद्र राशि
तुला 08:37 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:58
सूर्यास्त
17:07
चंद्रोदय
07:03
चंद्रास्त
17:53
दिनमान
11h 8m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2062
शक संवत
1927, पार्थिव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:15 – 05:07
अभिजीत मुहूर्त
11:10 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
12:56 – 14:19
यमगंड
05:58 – 07:22
गुलिक काल
08:45 – 10:09

3 नवंबर 2005 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:58 – 07:22शुभ
रोग07:22 – 08:45टालें
उद्वेग08:45 – 10:09टालें
चर10:09 – 11:32सामान्य
लाभ11:32 – 12:56शुभ
अमृत12:56 – 14:19शुभ
काल14:19 – 15:43टालें
शुभ15:43 – 17:07शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:07 – 18:43शुभ
चर18:43 – 20:20सामान्य
रोग20:20 – 21:56टालें
काल21:56 – 23:33टालें
लाभ23:33 – 01:09शुभ
उद्वेग01:09 – 02:46टालें
शुभ02:46 – 04:22शुभ
अमृत04:22 – 05:59शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:5806:54दिन
मंगल06:5407:50दिन
सूर्य07:5008:45दिन
शुक्र08:4509:41दिन
बुध09:4110:37दिन
चंद्र10:3711:32दिन
शनि11:3212:28दिन
गुरु12:2813:24दिन
मंगल13:2414:19दिन
सूर्य14:1915:15दिन
शुक्र15:1516:11दिन
बुध16:1117:07दिन
चंद्र17:0718:11रात
शनि18:1119:15रात
गुरु19:1520:20रात
मंगल20:2021:24रात
सूर्य21:2422:28रात
शुक्र22:2823:33रात
बुध23:3300:37रात
चंद्र00:3701:41रात
शनि01:4102:46रात
गुरु02:4603:50रात
मंगल03:5004:55रात
सूर्य04:5505:59रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 नव॰ 2005विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
12 नव॰ 2005शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
14 नव॰ 2005प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
16 नव॰ 2005कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
16 नव॰ 2005वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2005संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
24 नव॰ 2005कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
27 नव॰ 2005कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
29 नव॰ 2005प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
1 दिस॰ 2005मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9386° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।