7 नवंबर 2012 को पटना का पंचांग

बुधवार, 7 नवंबर 2012, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 7 नवंबर 2012 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (18:22 तक), नक्षत्र आश्लेषा (23:04 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:01 पर और सूर्यास्त 17:04 पर है। राहुकाल 11:32 से 12:55 तक है।

दिन और रात
दिन 06:01 – 17:04
रात 06:02 तक
तिथि
अष्टमी, 18:22 तक
नवमी
नक्षत्र
आश्लेषा, 23:04 तक
मघा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 नवंबर 2012 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 18:22 तक
कृष्ण नवमी 18:19, 8 नव॰ तक
नक्षत्र
मघा 23:28, 8 नव॰ तक
योग
शुक्ल 20:10 तक
ब्रह्म 18:56, 8 नव॰ तक
करण
बालव 06:05 तक
कौलव 18:22 तक
तैतिल 06:27, 8 नव॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 23:04 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:01
सूर्यास्त
17:04
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
12:17
दिनमान
11h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2069
शक संवत
1934, नंदन संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:17 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
11:10 – 11:55 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:32 – 12:55
यमगंड
07:24 – 08:47
गुलिक काल
10:10 – 11:32

7 नवंबर 2012 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:01 – 07:24शुभ
अमृत07:24 – 08:47शुभ
काल08:47 – 10:10टालें
शुभ10:10 – 11:32शुभ
रोग11:32 – 12:55टालें
उद्वेग12:55 – 14:18टालें
चर14:18 – 15:41सामान्य
लाभ15:41 – 17:04शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:04 – 18:41टालें
शुभ18:41 – 20:18शुभ
अमृत20:18 – 21:56शुभ
चर21:56 – 23:33सामान्य
रोग23:33 – 01:10टालें
काल01:10 – 02:47टालें
लाभ02:47 – 04:24शुभ
उद्वेग04:24 – 06:02टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:0106:56दिन
चंद्र06:5607:52दिन
शनि07:5208:47दिन
गुरु08:4709:42दिन
मंगल09:4210:37दिन
सूर्य10:3711:32दिन
शुक्र11:3212:28दिन
बुध12:2813:23दिन
चंद्र13:2314:18दिन
शनि14:1815:13दिन
गुरु15:1316:09दिन
मंगल16:0917:04दिन
सूर्य17:0418:09रात
शुक्र18:0919:14रात
बुध19:1420:18रात
चंद्र20:1821:23रात
शनि21:2322:28रात
गुरु22:2823:33रात
मंगल23:3300:38रात
सूर्य00:3801:42रात
शुक्र01:4202:47रात
बुध02:4703:52रात
चंद्र03:5204:57रात
शनि04:5706:02रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 नव॰ 2012कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 नव॰ 2012कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 नव॰ 2012प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 नव॰ 2012कार्तिक अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2012वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2012विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
24 नव॰ 2012शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 नव॰ 2012प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 नव॰ 2012कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
2 दिस॰ 2012संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0366° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।