1 नवंबर 2014 को पटना का पंचांग

शनिवार, 1 नवंबर 2014, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 1 नवंबर 2014 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (17:00 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (23:20 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 05:57 पर और सूर्यास्त 17:08 पर है। राहुकाल 08:45 से 10:09 तक है।

दिन और रात
दिन 05:57 – 17:08
रात 05:57 तक
तिथि
नवमी, 17:00 तक
दशमी
नक्षत्र
धनिष्ठा, 23:20 तक
शतभिषा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 नवंबर 2014 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल नवमी 17:00 तक
शुक्ल दशमी 14:39, 2 नव॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 21:41, 2 नव॰ तक
योग
गंडअशुभ 09:59 तक
वृद्धि 06:55, 2 नव॰ तक
करण
बालव 06:08 तक
कौलव 17:00 तक
तैतिल 03:50, 2 नव॰ तक
गर 14:39, 2 नव॰ तक
चंद्र राशि
मकर 12:07 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:57
सूर्यास्त
17:08
चंद्रोदय
13:07
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
11h 11m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2071
शक संवत
1936, जय संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:14 – 05:06
अभिजीत मुहूर्त
11:10 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
08:45 – 10:09
यमगंड
12:56 – 14:20
गुलिक काल
05:57 – 07:21

1 नवंबर 2014 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:57 – 07:21टालें
शुभ07:21 – 08:45शुभ
रोग08:45 – 10:09टालें
उद्वेग10:09 – 11:32टालें
चर11:32 – 12:56सामान्य
लाभ12:56 – 14:20शुभ
अमृत14:20 – 15:44शुभ
काल15:44 – 17:08टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:08 – 18:44शुभ
उद्वेग18:44 – 20:20टालें
शुभ20:20 – 21:57शुभ
अमृत21:57 – 23:33शुभ
चर23:33 – 01:09सामान्य
रोग01:09 – 02:45टालें
काल02:45 – 04:21टालें
लाभ04:21 – 05:57शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:5706:53दिन
गुरु06:5307:49दिन
मंगल07:4908:45दिन
सूर्य08:4509:41दिन
शुक्र09:4110:36दिन
बुध10:3611:32दिन
चंद्र11:3212:28दिन
शनि12:2813:24दिन
गुरु13:2414:20दिन
मंगल14:2015:16दिन
सूर्य15:1616:12दिन
शुक्र16:1217:08दिन
बुध17:0818:12रात
चंद्र18:1219:16रात
शनि19:1620:20रात
गुरु20:2021:24रात
मंगल21:2422:29रात
सूर्य22:2923:33रात
शुक्र23:3300:37रात
बुध00:3701:41रात
चंद्र01:4102:45रात
शनि02:4503:49रात
गुरु03:4904:53रात
मंगल04:5305:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 नव॰ 2014शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 नव॰ 2014प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 नव॰ 2014कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
10 नव॰ 2014संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 नव॰ 2014कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 नव॰ 2014वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2014कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 नव॰ 2014प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 नव॰ 2014मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
26 नव॰ 2014विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0643° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।