13 नवंबर 2015 को पटना का पंचांग

शुक्रवार, 13 नवंबर 2015, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 13 नवंबर 2015 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (01:47, 14 नव॰ तक), नक्षत्र अनुराधा (17:25 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:05 पर और सूर्यास्त 17:01 पर है। राहुकाल 10:11 से 11:33 तक है।

दिन और रात
दिन 06:05 – 17:01
रात 06:05 तक
तिथि
द्वितीया, 01:47 तक
तृतीया
नक्षत्र
अनुराधा, 17:25 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 नवंबर 2015 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 01:47, 14 नव॰ तक
शुक्ल तृतीया 02:24, 15 नव॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 18:44, 14 नव॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 05:08, 14 नव॰ तक
सुकर्मा 04:26, 15 नव॰ तक
करण
बालव 13:19 तक
कौलव 01:47, 14 नव॰ तक
तैतिल 14:09, 14 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:05
सूर्यास्त
17:01
चंद्रोदय
07:12
चंद्रास्त
18:26
दिनमान
10h 57m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2072
शक संवत
1937, मन्मथ संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:20 – 05:12
अभिजीत मुहूर्त
11:11 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
10:11 – 11:33
यमगंड
14:17 – 15:39
गुलिक काल
07:27 – 08:49

13 नवंबर 2015 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:05 – 07:27सामान्य
लाभ07:27 – 08:49शुभ
अमृत08:49 – 10:11शुभ
काल10:11 – 11:33टालें
शुभ11:33 – 12:55शुभ
रोग12:55 – 14:17टालें
उद्वेग14:17 – 15:39टालें
चर15:39 – 17:01सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:01 – 18:39टालें
काल18:39 – 20:17टालें
लाभ20:17 – 21:55शुभ
उद्वेग21:55 – 23:33टालें
शुभ23:33 – 01:11शुभ
अमृत01:11 – 02:49शुभ
चर02:49 – 04:27सामान्य
रोग04:27 – 06:05टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:0506:59दिन
बुध06:5907:54दिन
चंद्र07:5408:49दिन
शनि08:4909:44दिन
गुरु09:4410:38दिन
मंगल10:3811:33दिन
सूर्य11:3312:28दिन
शुक्र12:2813:22दिन
बुध13:2214:17दिन
चंद्र14:1715:12दिन
शनि15:1216:07दिन
गुरु16:0717:01दिन
मंगल17:0118:07रात
सूर्य18:0719:12रात
शुक्र19:1220:17रात
बुध20:1721:23रात
चंद्र21:2322:28रात
शनि22:2823:33रात
गुरु23:3300:39रात
मंगल00:3901:44रात
सूर्य01:4402:49रात
शुक्र02:4903:55रात
बुध03:5505:00रात
चंद्र05:0006:05रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 नव॰ 2015विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 नव॰ 2015वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
22 नव॰ 2015शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 नव॰ 2015प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 नव॰ 2015कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
29 नव॰ 2015संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 दिस॰ 2015कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 दिस॰ 2015कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 दिस॰ 2015प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 दिस॰ 2015मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0787° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।