17 नवंबर 2016 को पटना का पंचांग

गुरुवार, 17 नवंबर 2016, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 17 नवंबर 2016 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (08:22 तक), नक्षत्र मृगशिरा (07:40 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 06:08 पर और सूर्यास्त 17:00 पर है। राहुकाल 12:55 से 14:17 तक है।

दिन और रात
दिन 06:08 – 17:00
रात 06:09 तक
तिथि
चतुर्थी, 05:35 तक
नक्षत्र
आर्द्रा, 05:37 तक
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 नवंबर 2016 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 08:22 तक
कृष्ण चतुर्थी 05:35, 18 नव॰ तक
कृष्ण पंचमी 03:32, 19 नव॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 05:37, 18 नव॰ तक
पुनर्वसु 04:16, 19 नव॰ तक
योग
सिद्ध 11:07 तक
साध्य 07:43, 18 नव॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 08:22 तक
बव 18:54 तक
बालव 05:35, 18 नव॰ तक
कौलव 16:28, 18 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:08
सूर्यास्त
17:00
चंद्रोदय
19:59
चंद्रास्त
08:45
दिनमान
10h 52m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2073
शक संवत
1938, दुर्मुख संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:23 – 05:15
अभिजीत मुहूर्त
11:12 – 11:56

अशुभ समय

राहुकाल
12:55 – 14:17
यमगंड
06:08 – 07:29
गुलिक काल
08:51 – 10:12

17 नवंबर 2016 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:08 – 07:29शुभ
रोग07:29 – 08:51टालें
उद्वेग08:51 – 10:12टालें
चर10:12 – 11:34सामान्य
लाभ11:34 – 12:55शुभ
अमृत12:55 – 14:17शुभ
काल14:17 – 15:38टालें
शुभ15:38 – 17:00शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:00 – 18:38शुभ
चर18:38 – 20:17सामान्य
रोग20:17 – 21:56टालें
काल21:56 – 23:34टालें
लाभ23:34 – 01:13शुभ
उद्वेग01:13 – 02:51टालें
शुभ02:51 – 04:30शुभ
अमृत04:30 – 06:09शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0807:02दिन
मंगल07:0207:57दिन
सूर्य07:5708:51दिन
शुक्र08:5109:45दिन
बुध09:4510:40दिन
चंद्र10:4011:34दिन
शनि11:3412:28दिन
गुरु12:2813:22दिन
मंगल13:2214:17दिन
सूर्य14:1715:11दिन
शुक्र15:1116:05दिन
बुध16:0517:00दिन
चंद्र17:0018:05रात
शनि18:0519:11रात
गुरु19:1120:17रात
मंगल20:1721:23रात
सूर्य21:2322:28रात
शुक्र22:2823:34रात
बुध23:3400:40रात
चंद्र00:4001:46रात
शनि01:4602:51रात
गुरु02:5103:57रात
मंगल03:5705:03रात
सूर्य05:0306:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 नव॰ 2016संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 नव॰ 2016कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2016कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 नव॰ 2016प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 नव॰ 2016मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
3 दिस॰ 2016विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 दिस॰ 2016शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 दिस॰ 2016प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 दिस॰ 2016मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
15 दिस॰ 2016धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0928° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।