18 नवंबर 2016 को पटना का पंचांग

शुक्रवार, 18 नवंबर 2016, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 18 नवंबर 2016 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (03:32, 19 नव॰ तक), नक्षत्र पुनर्वसु (04:16, 19 नव॰ तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:09 पर और सूर्यास्त 16:59 पर है। राहुकाल 10:13 से 11:34 तक है।

दिन और रात
दिन 06:09 – 16:59
रात 06:09 तक
तिथि
पंचमी, 03:32 तक
षष्ठी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 04:16 तक
पुष्य
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 नवंबर 2016 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 03:32, 19 नव॰ तक
कृष्ण षष्ठी 02:17, 20 नव॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 04:16, 19 नव॰ तक
पुष्य 03:43, 20 नव॰ तक
योग
साध्य 07:43 तक
शुभ 04:54, 19 नव॰ तक
शुक्ल 02:44, 20 नव॰ तक
करण
कौलव 16:28 तक
तैतिल 03:32, 19 नव॰ तक
गर 14:48, 19 नव॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 22:32 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:09
सूर्यास्त
16:59
चंद्रोदय
20:59
चंद्रास्त
09:44
दिनमान
10h 51m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2073
शक संवत
1938, दुर्मुख संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:24 – 05:16
अभिजीत मुहूर्त
11:12 – 11:56

अशुभ समय

राहुकाल
10:13 – 11:34
यमगंड
14:17 – 15:38
गुलिक काल
07:30 – 08:51

18 नवंबर 2016 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:09 – 07:30सामान्य
लाभ07:30 – 08:51शुभ
अमृत08:51 – 10:13शुभ
काल10:13 – 11:34टालें
शुभ11:34 – 12:55शुभ
रोग12:55 – 14:17टालें
उद्वेग14:17 – 15:38टालें
चर15:38 – 16:59सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग16:59 – 18:38टालें
काल18:38 – 20:17टालें
लाभ20:17 – 21:56शुभ
उद्वेग21:56 – 23:34टालें
शुभ23:34 – 01:13शुभ
अमृत01:13 – 02:52शुभ
चर02:52 – 04:31सामान्य
रोग04:31 – 06:09टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:0907:03दिन
बुध07:0307:57दिन
चंद्र07:5708:51दिन
शनि08:5109:46दिन
गुरु09:4610:40दिन
मंगल10:4011:34दिन
सूर्य11:3412:28दिन
शुक्र12:2813:22दिन
बुध13:2214:17दिन
चंद्र14:1715:11दिन
शनि15:1116:05दिन
गुरु16:0516:59दिन
मंगल16:5918:05रात
सूर्य18:0519:11रात
शुक्र19:1120:17रात
बुध20:1721:23रात
चंद्र21:2322:29रात
शनि22:2923:34रात
गुरु23:3400:40रात
मंगल00:4001:46रात
सूर्य01:4602:52रात
शुक्र02:5203:58रात
बुध03:5805:04रात
चंद्र05:0406:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 नव॰ 2016कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2016कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 नव॰ 2016प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 नव॰ 2016मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
3 दिस॰ 2016विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 दिस॰ 2016शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 दिस॰ 2016प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 दिस॰ 2016मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
15 दिस॰ 2016धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2016संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0929° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।