20 नवंबर 2016 को पटना का पंचांग

रविवार, 20 नवंबर 2016, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 20 नवंबर 2016 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (01:55, 21 नव॰ तक), नक्षत्र आश्लेषा (04:02, 21 नव॰ तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 06:10 पर और सूर्यास्त 16:59 पर है। राहुकाल 15:38 से 16:59 तक है।

दिन और रात
दिन 06:10 – 16:59
रात 06:11 तक
तिथि
सप्तमी, 01:55 तक
अष्टमी
नक्षत्र
आश्लेषा, 04:02 तक
मघा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 नवंबर 2016 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 01:55, 21 नव॰ तक
कृष्ण अष्टमी 02:23, 22 नव॰ तक
नक्षत्र
आश्लेषा 04:02, 21 नव॰ तक
मघा 05:08, 22 नव॰ तक
योग
ब्रह्म 01:15, 21 नव॰ तक
इंद्र 00:25, 22 नव॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 14:00 तक
बव 01:55, 21 नव॰ तक
बालव 14:03, 21 नव॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 04:02, 21 नव॰ तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:10
सूर्यास्त
16:59
चंद्रोदय
22:57
चंद्रास्त
11:25
दिनमान
10h 49m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2073
शक संवत
1938, दुर्मुख संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:25 – 05:17
अभिजीत मुहूर्त
11:13 – 11:56

अशुभ समय

राहुकाल
15:38 – 16:59
यमगंड
11:34 – 12:56
गुलिक काल
14:17 – 15:38

20 नवंबर 2016 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:10 – 07:31टालें
चर07:31 – 08:52सामान्य
लाभ08:52 – 10:13शुभ
अमृत10:13 – 11:34शुभ
काल11:34 – 12:56टालें
शुभ12:56 – 14:17शुभ
रोग14:17 – 15:38टालें
उद्वेग15:38 – 16:59टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ16:59 – 18:38शुभ
अमृत18:38 – 20:17शुभ
चर20:17 – 21:56सामान्य
रोग21:56 – 23:35टालें
काल23:35 – 01:14टालें
लाभ01:14 – 02:53शुभ
उद्वेग02:53 – 04:32टालें
शुभ04:32 – 06:11शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:1007:04दिन
शुक्र07:0407:58दिन
बुध07:5808:52दिन
चंद्र08:5209:46दिन
शनि09:4610:40दिन
गुरु10:4011:34दिन
मंगल11:3412:29दिन
सूर्य12:2913:23दिन
शुक्र13:2314:17दिन
बुध14:1715:11दिन
चंद्र15:1116:05दिन
शनि16:0516:59दिन
गुरु16:5918:05रात
मंगल18:0519:11रात
सूर्य19:1120:17रात
शुक्र20:1721:23रात
बुध21:2322:29रात
चंद्र22:2923:35रात
शनि23:3500:41रात
गुरु00:4101:47रात
मंगल01:4702:53रात
सूर्य02:5303:59रात
शुक्र03:5905:05रात
बुध05:0506:11रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 नव॰ 2016कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2016कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 नव॰ 2016प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 नव॰ 2016मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
3 दिस॰ 2016विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 दिस॰ 2016शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 दिस॰ 2016प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 दिस॰ 2016मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
15 दिस॰ 2016धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2016संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0929° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।