6 नवंबर 2017 को पटना का पंचांग

सोमवार, 6 नवंबर 2017, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 6 नवंबर 2017 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (00:59, 7 नव॰ तक), नक्षत्र रोहिणी (19:55 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 06:00 पर और सूर्यास्त 17:05 पर है। राहुकाल 07:23 से 08:46 तक है।

दिन और रात
दिन 06:00 – 17:05
रात 06:01 तक
तिथि
तृतीया, 00:59 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
रोहिणी, 19:55 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 नवंबर 2017 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 00:59, 7 नव॰ तक
कृष्ण चतुर्थी 21:51, 7 नव॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 19:55 तक
मृगशिरा 17:29, 7 नव॰ तक
योग
परिघअशुभ 19:31 तक
शिव 15:43, 7 नव॰ तक
करण
वणिज 14:37 तक
विष्टि (भद्रा) 00:59, 7 नव॰ तक
बव 11:23, 7 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:00
सूर्यास्त
17:05
चंद्रोदय
19:15
चंद्रास्त
07:57
दिनमान
11h 4m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2074
शक संवत
1939, हेमलंब संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:17 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
11:10 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
07:23 – 08:46
यमगंड
10:09 – 11:32
गुलिक काल
12:55 – 14:19

6 नवंबर 2017 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:00 – 07:23शुभ
काल07:23 – 08:46टालें
शुभ08:46 – 10:09शुभ
रोग10:09 – 11:32टालें
उद्वेग11:32 – 12:55टालें
चर12:55 – 14:19सामान्य
लाभ14:19 – 15:42शुभ
अमृत15:42 – 17:05शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:05 – 18:42सामान्य
रोग18:42 – 20:19टालें
काल20:19 – 21:56टालें
लाभ21:56 – 23:33शुभ
उद्वेग23:33 – 01:10टालें
शुभ01:10 – 02:47शुभ
अमृत02:47 – 04:24शुभ
चर04:24 – 06:01सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:0006:56दिन
शनि06:5607:51दिन
गुरु07:5108:46दिन
मंगल08:4609:42दिन
सूर्य09:4210:37दिन
शुक्र10:3711:32दिन
बुध11:3212:28दिन
चंद्र12:2813:23दिन
शनि13:2314:19दिन
गुरु14:1915:14दिन
मंगल15:1416:09दिन
सूर्य16:0917:05दिन
शुक्र17:0518:09रात
बुध18:0919:14रात
चंद्र19:1420:19रात
शनि20:1921:23रात
गुरु21:2322:28रात
मंगल22:2823:33रात
सूर्य23:3300:37रात
शुक्र00:3701:42रात
बुध01:4202:47रात
चंद्र02:4703:52रात
शनि03:5204:56रात
गुरु04:5606:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 नव॰ 2017संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 नव॰ 2017कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 नव॰ 2017कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2017प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 नव॰ 2017वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2017मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
22 नव॰ 2017विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 नव॰ 2017शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 दिस॰ 2017प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 दिस॰ 2017मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1064° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।