5 नवंबर 2021 को पटना का पंचांग

शुक्रवार, 5 नवंबर 2021, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 5 नवंबर 2021 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (23:14 तक), नक्षत्र विशाखा (02:22, 6 नव॰ तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 06:00 पर और सूर्यास्त 17:05 पर है। राहुकाल 10:09 से 11:32 तक है।

दिन और रात
दिन 06:00 – 17:05
रात 06:00 तक
तिथि
प्रतिपदा, 23:14 तक
द्वितीया
नक्षत्र
विशाखा, 02:22 तक
अनुराधा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 नवंबर 2021 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 23:14 तक
शुक्ल द्वितीया 19:44, 6 नव॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 02:22, 6 नव॰ तक
अनुराधा 23:38, 6 नव॰ तक
योग
आयुष्मान 07:12 तक
सौभाग्य 03:07, 6 नव॰ तक
शोभन 23:03, 6 नव॰ तक
करण
किंस्तुघ्न 13:00 तक
बव 23:14 तक
बालव 09:29, 6 नव॰ तक
चंद्र राशि
तुला 21:04 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:00
सूर्यास्त
17:05
चंद्रोदय
06:12
चंद्रास्त
17:33
दिनमान
11h 6m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2078
शक संवत
1943, प्लव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:16 – 05:08
अभिजीत मुहूर्त
11:10 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
10:09 – 11:32
यमगंड
14:19 – 15:42
गुलिक काल
07:23 – 08:46

5 नवंबर 2021 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:00 – 07:23सामान्य
लाभ07:23 – 08:46शुभ
अमृत08:46 – 10:09शुभ
काल10:09 – 11:32टालें
शुभ11:32 – 12:56शुभ
रोग12:56 – 14:19टालें
उद्वेग14:19 – 15:42टालें
चर15:42 – 17:05सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:05 – 18:42टालें
काल18:42 – 20:19टालें
लाभ20:19 – 21:56शुभ
उद्वेग21:56 – 23:33टालें
शुभ23:33 – 01:10शुभ
अमृत01:10 – 02:46शुभ
चर02:46 – 04:23सामान्य
रोग04:23 – 06:00टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:0006:55दिन
बुध06:5507:51दिन
चंद्र07:5108:46दिन
शनि08:4609:41दिन
गुरु09:4110:37दिन
मंगल10:3711:32दिन
सूर्य11:3212:28दिन
शुक्र12:2813:23दिन
बुध13:2314:19दिन
चंद्र14:1915:14दिन
शनि15:1416:10दिन
गुरु16:1017:05दिन
मंगल17:0518:10रात
सूर्य18:1019:14रात
शुक्र19:1420:19रात
बुध20:1921:24रात
चंद्र21:2422:28रात
शनि22:2823:33रात
गुरु23:3300:37रात
मंगल00:3701:42रात
सूर्य01:4202:46रात
शुक्र02:4603:51रात
बुध03:5104:56रात
चंद्र04:5606:00रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 नव॰ 2021विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 नव॰ 2021शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2021वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2021प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
19 नव॰ 2021कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
23 नव॰ 2021संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 नव॰ 2021कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
30 नव॰ 2021कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 दिस॰ 2021प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 दिस॰ 2021मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1622° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।