5 दिसंबर 2025 को पटना का पंचांग

शुक्रवार, 5 दिसंबर 2025, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 5 दिसंबर 2025 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (00:56, 6 दिस॰ तक), नक्षत्र रोहिणी (11:46 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 06:21 पर और सूर्यास्त 16:58 पर है। राहुकाल 10:20 से 11:39 तक है।

दिन और रात
दिन 06:21 – 16:58
रात 06:22 तक
तिथि
प्रतिपदा, 00:56 तक
द्वितीया
नक्षत्र
रोहिणी, 11:46 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 दिसंबर 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 00:56, 6 दिस॰ तक
कृष्ण द्वितीया 21:26, 6 दिस॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 11:46 तक
मृगशिरा 08:48, 6 दिस॰ तक
योग
सिद्ध 08:08 तक
साध्य 03:48, 6 दिस॰ तक
शुभ 23:45, 6 दिस॰ तक
करण
बालव 14:48 तक
कौलव 00:56, 6 दिस॰ तक
तैतिल 11:08, 6 दिस॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 22:15 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:21
सूर्यास्त
16:58
चंद्रोदय
17:12
चंद्रास्त
06:39
दिनमान
10h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:34 – 05:27
अभिजीत मुहूर्त
11:18 – 12:01

अशुभ समय

राहुकाल
10:20 – 11:39
यमगंड
14:19 – 15:38
गुलिक काल
07:41 – 09:00

5 दिसंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:21 – 07:41सामान्य
लाभ07:41 – 09:00शुभ
अमृत09:00 – 10:20शुभ
काल10:20 – 11:39टालें
शुभ11:39 – 12:59शुभ
रोग12:59 – 14:19टालें
उद्वेग14:19 – 15:38टालें
चर15:38 – 16:58सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग16:58 – 18:39टालें
काल18:39 – 20:19टालें
लाभ20:19 – 21:59शुभ
उद्वेग21:59 – 23:40टालें
शुभ23:40 – 01:20शुभ
अमृत01:20 – 03:01शुभ
चर03:01 – 04:41सामान्य
रोग04:41 – 06:22टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:2107:14दिन
बुध07:1408:07दिन
चंद्र08:0709:00दिन
शनि09:0009:53दिन
गुरु09:5310:46दिन
मंगल10:4611:39दिन
सूर्य11:3912:33दिन
शुक्र12:3313:26दिन
बुध13:2614:19दिन
चंद्र14:1915:12दिन
शनि15:1216:05दिन
गुरु16:0516:58दिन
मंगल16:5818:05रात
सूर्य18:0519:12रात
शुक्र19:1220:19रात
बुध20:1921:26रात
चंद्र21:2622:33रात
शनि22:3323:40रात
गुरु23:4000:47रात
मंगल00:4701:54रात
सूर्य01:5403:01रात
शुक्र03:0104:08रात
बुध04:0805:15रात
चंद्र05:1506:22रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 दिस॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 दिस॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 दिस॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 दिस॰ 2025धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 दिस॰ 2025पौष अमावस्याअमावस्या
24 दिस॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 जन॰ 2026पौष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2192° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।