17 फ़रवरी 2026 को पटना का पंचांग

मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (17:31 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (21:16 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 06:23 पर और सूर्यास्त 17:44 पर है। राहुकाल 14:53 से 16:18 तक है।

दिन और रात
दिन 06:23 – 17:44
रात 06:22 तक
तिथि
अमावस्या, 17:31 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
धनिष्ठा, 21:16 तक
शतभिषा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 फ़रवरी 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
अमावस्या 17:31 तक
शुक्ल प्रतिपदा 16:58, 18 फ़र॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 21:16, 18 फ़र॰ तक
योग
परिघअशुभ 00:28, 18 फ़र॰ तक
शिव 22:45, 18 फ़र॰ तक
करण
नाग 17:31 तक
किंस्तुघ्न 05:18, 18 फ़र॰ तक
बव 16:58, 18 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
मकर 09:05 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:23
सूर्यास्त
17:44
चंद्रोदय
06:14
चंद्रास्त
17:39
दिनमान
11h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:41 – 05:32
अभिजीत मुहूर्त
11:40 – 12:26

अशुभ समय

राहुकाल
14:53 – 16:18
यमगंड
09:13 – 10:38
गुलिक काल
12:03 – 13:28

17 फ़रवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:23 – 07:48टालें
उद्वेग07:48 – 09:13टालें
चर09:13 – 10:38सामान्य
लाभ10:38 – 12:03शुभ
अमृत12:03 – 13:28शुभ
काल13:28 – 14:53टालें
शुभ14:53 – 16:18शुभ
रोग16:18 – 17:44टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:44 – 19:18टालें
लाभ19:18 – 20:53शुभ
उद्वेग20:53 – 22:28टालें
शुभ22:28 – 00:03शुभ
अमृत00:03 – 01:37शुभ
चर01:37 – 03:12सामान्य
रोग03:12 – 04:47टालें
काल04:47 – 06:22टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:2307:19दिन
सूर्य07:1908:16दिन
शुक्र08:1609:13दिन
बुध09:1310:10दिन
चंद्र10:1011:06दिन
शनि11:0612:03दिन
गुरु12:0313:00दिन
मंगल13:0013:57दिन
सूर्य13:5714:53दिन
शुक्र14:5315:50दिन
बुध15:5016:47दिन
चंद्र16:4717:44दिन
शनि17:4418:47रात
गुरु18:4719:50रात
मंगल19:5020:53रात
सूर्य20:5321:56रात
शुक्र21:5623:00रात
बुध23:0000:03रात
चंद्र00:0301:06रात
शनि01:0602:09रात
गुरु02:0903:12रात
मंगल03:1204:15रात
सूर्य04:1505:19रात
शुक्र05:1906:22रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 फ़र॰ 2026फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
21 फ़र॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 फ़र॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 मार्च 2026फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
7 मार्च 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 मार्च 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 मार्च 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 मार्च 2026मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
17 मार्च 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2221° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।