29 अप्रैल 2026 को पटना का पंचांग

बुधवार, 29 अप्रैल 2026, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (19:52 तक), नक्षत्र हस्त (00:16, 30 अप्रैल तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 05:14 पर और सूर्यास्त 18:19 पर है। राहुकाल 11:46 से 13:25 तक है।

दिन और रात
दिन 05:14 – 18:19
रात 05:13 तक
तिथि
त्रयोदशी, 19:52 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
हस्त, 00:16 तक
चित्रा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 अप्रैल 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 19:52 तक
शुक्ल चतुर्दशी 21:13, 30 अप्रैल तक
नक्षत्र
हस्त 00:16, 30 अप्रैल तक
चित्रा 02:16, 1 मई तक
योग
हर्षण 20:51 तक
वज्रअशुभ 20:55, 30 अप्रैल तक
करण
कौलव 07:19 तक
तैतिल 19:52 तक
गर 08:30, 30 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:14
सूर्यास्त
18:19
चंद्रोदय
16:20
चंद्रास्त
03:32
दिनमान
13h 4m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:47 – 04:31
अभिजीत मुहूर्त
11:20 – 12:13 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:46 – 13:25
यमगंड
06:52 – 08:30
गुलिक काल
10:08 – 11:46

29 अप्रैल 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:14 – 06:52शुभ
अमृत06:52 – 08:30शुभ
काल08:30 – 10:08टालें
शुभ10:08 – 11:46शुभ
रोग11:46 – 13:25टालें
उद्वेग13:25 – 15:03टालें
चर15:03 – 16:41सामान्य
लाभ16:41 – 18:19शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:19 – 19:41टालें
शुभ19:41 – 21:02शुभ
अमृत21:02 – 22:24शुभ
चर22:24 – 23:46सामान्य
रोग23:46 – 01:08टालें
काल01:08 – 02:30टालें
लाभ02:30 – 03:52शुभ
उद्वेग03:52 – 05:13टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:1406:20दिन
चंद्र06:2007:25दिन
शनि07:2508:30दिन
गुरु08:3009:36दिन
मंगल09:3610:41दिन
सूर्य10:4111:46दिन
शुक्र11:4612:52दिन
बुध12:5213:57दिन
चंद्र13:5715:03दिन
शनि15:0316:08दिन
गुरु16:0817:13दिन
मंगल17:1318:19दिन
सूर्य18:1919:13रात
शुक्र19:1320:08रात
बुध20:0821:02रात
चंद्र21:0221:57रात
शनि21:5722:52रात
गुरु22:5223:46रात
मंगल23:4600:41रात
सूर्य00:4101:35रात
शुक्र01:3502:30रात
बुध02:3003:24रात
चंद्र03:2404:19रात
शनि04:1905:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 अप्रैल 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 मई 2026वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
6 मई 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 मई 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 मई 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 मई 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 मई 2026वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2026ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
20 मई 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 मई 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2248° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।