21 अगस्त 2026 को पटना का पंचांग

शुक्रवार, 21 अगस्त 2026, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (23:36 तक), नक्षत्र अनुराधा (11:53 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:25 पर और सूर्यास्त 18:19 पर है। राहुकाल 10:15 से 11:52 तक है।

दिन और रात
दिन 05:25 – 18:19
रात 05:25 तक
तिथि
नवमी, 23:36 तक
दशमी
नक्षत्र
अनुराधा, 11:53 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 अगस्त 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल नवमी 23:36 तक
शुक्ल दशमी 02:00, 23 अग॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 14:49, 22 अग॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 05:18, 22 अग॰ तक
विष्कंभअशुभ 06:14, 23 अग॰ तक
करण
बालव 10:26 तक
कौलव 23:36 तक
तैतिल 12:48, 22 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:25
सूर्यास्त
18:19
चंद्रोदय
13:25
चंद्रास्त
23:50
दिनमान
12h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:56 – 04:40
अभिजीत मुहूर्त
11:26 – 12:18

अशुभ समय

राहुकाल
10:15 – 11:52
यमगंड
15:06 – 16:42
गुलिक काल
07:02 – 08:38

21 अगस्त 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:25 – 07:02सामान्य
लाभ07:02 – 08:38शुभ
अमृत08:38 – 10:15शुभ
काल10:15 – 11:52टालें
शुभ11:52 – 13:29शुभ
रोग13:29 – 15:06टालें
उद्वेग15:06 – 16:42टालें
चर16:42 – 18:19सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:19 – 19:42टालें
काल19:42 – 21:06टालें
लाभ21:06 – 22:29शुभ
उद्वेग22:29 – 23:52टालें
शुभ23:52 – 01:15शुभ
अमृत01:15 – 02:39शुभ
चर02:39 – 04:02सामान्य
रोग04:02 – 05:25टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:2506:29दिन
बुध06:2907:34दिन
चंद्र07:3408:38दिन
शनि08:3809:43दिन
गुरु09:4310:47दिन
मंगल10:4711:52दिन
सूर्य11:5212:57दिन
शुक्र12:5714:01दिन
बुध14:0115:06दिन
चंद्र15:0616:10दिन
शनि16:1017:15दिन
गुरु17:1518:19दिन
मंगल18:1919:15रात
सूर्य19:1520:10रात
शुक्र20:1021:06रात
बुध21:0622:01रात
चंद्र22:0122:57रात
शनि22:5723:52रात
गुरु23:5200:48रात
मंगल00:4801:43रात
सूर्य01:4302:39रात
शुक्र02:3903:34रात
बुध03:3404:30रात
चंद्र04:3005:25रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 अग॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 अग॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 अग॰ 2026श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
1 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 सित॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 सित॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 सित॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 सित॰ 2026भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
15 सित॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2026कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2291° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।