10 जुलाई 2027 को पटना का पंचांग

शनिवार, 10 जुलाई 2027, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 10 जुलाई 2027 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (12:37 तक), नक्षत्र हस्त (22:51 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:05 पर और सूर्यास्त 18:44 पर है। राहुकाल 08:30 से 10:12 तक है।

दिन और रात
दिन 05:05 – 18:44
रात 05:05 तक
तिथि
सप्तमी, 12:37 तक
अष्टमी
नक्षत्र
हस्त, 22:51 तक
चित्रा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 जुलाई 2027 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 12:37 तक
शुक्ल अष्टमी 11:50, 11 जुल॰ तक
नक्षत्र
हस्त 22:51 तक
चित्रा 23:05, 11 जुल॰ तक
योग
परिघअशुभ 16:10 तक
शिव 14:36, 11 जुल॰ तक
करण
वणिज 12:37 तक
विष्टि (भद्रा) 00:09, 11 जुल॰ तक
बव 11:50, 11 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:05
सूर्यास्त
18:44
चंद्रोदय
11:28
चंद्रास्त
23:11
दिनमान
13h 39m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:42 – 04:24
अभिजीत मुहूर्त
11:27 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
08:30 – 10:12
यमगंड
13:37 – 15:19
गुलिक काल
05:05 – 06:47

10 जुलाई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:05 – 06:47टालें
शुभ06:47 – 08:30शुभ
रोग08:30 – 10:12टालें
उद्वेग10:12 – 11:54टालें
चर11:54 – 13:37सामान्य
लाभ13:37 – 15:19शुभ
अमृत15:19 – 17:01शुभ
काल17:01 – 18:44टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:44 – 20:01शुभ
उद्वेग20:01 – 21:19टालें
शुभ21:19 – 22:37शुभ
अमृत22:37 – 23:54शुभ
चर23:54 – 01:12सामान्य
रोग01:12 – 02:30टालें
काल02:30 – 03:48टालें
लाभ03:48 – 05:05शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:0506:13दिन
गुरु06:1307:21दिन
मंगल07:2108:30दिन
सूर्य08:3009:38दिन
शुक्र09:3810:46दिन
बुध10:4611:54दिन
चंद्र11:5413:02दिन
शनि13:0214:11दिन
गुरु14:1115:19दिन
मंगल15:1916:27दिन
सूर्य16:2717:35दिन
शुक्र17:3518:44दिन
बुध18:4419:35रात
चंद्र19:3520:27रात
शनि20:2721:19रात
गुरु21:1922:11रात
मंगल22:1123:03रात
सूर्य23:0323:54रात
शुक्र23:5400:46रात
बुध00:4601:38रात
चंद्र01:3802:30रात
शनि02:3003:22रात
गुरु03:2204:14रात
मंगल04:1405:05रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 जुल॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 जुल॰ 2027कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2027आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
22 जुल॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जुल॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जुल॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 अग॰ 2027श्रावण अमावस्याअमावस्या
5 अग॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2415° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।