13 जुलाई 2027 को पटना का पंचांग

मंगलवार, 13 जुलाई 2027, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 13 जुलाई 2027 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (12:09 तक), नक्षत्र विशाखा (01:22, 14 जुल॰ तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 05:06 पर और सूर्यास्त 18:43 पर है। राहुकाल 15:19 से 17:01 तक है।

दिन और रात
दिन 05:06 – 18:43
रात 05:07 तक
तिथि
दशमी, 12:09 तक
एकादशी
नक्षत्र
विशाखा, 01:22 तक
अनुराधा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 जुलाई 2027 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल दशमी 12:09 तक
शुक्ल एकादशी 13:10, 14 जुल॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 01:22, 14 जुल॰ तक
अनुराधा 03:18, 15 जुल॰ तक
योग
साध्य 12:57 तक
शुभ 12:49, 14 जुल॰ तक
करण
गर 12:09 तक
वणिज 00:36, 14 जुल॰ तक
विष्टि (भद्रा) 13:10, 14 जुल॰ तक
चंद्र राशि
तुला 18:57 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:06
सूर्यास्त
18:43
चंद्रोदय
14:25
चंद्रास्त
00:25
दिनमान
13h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:43 – 04:25
अभिजीत मुहूर्त
11:27 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
15:19 – 17:01
यमगंड
08:30 – 10:13
गुलिक काल
11:55 – 13:37

13 जुलाई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:06 – 06:48टालें
उद्वेग06:48 – 08:30टालें
चर08:30 – 10:13सामान्य
लाभ10:13 – 11:55शुभ
अमृत11:55 – 13:37शुभ
काल13:37 – 15:19टालें
शुभ15:19 – 17:01शुभ
रोग17:01 – 18:43टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:43 – 20:01टालें
लाभ20:01 – 21:19शुभ
उद्वेग21:19 – 22:37टालें
शुभ22:37 – 23:55शुभ
अमृत23:55 – 01:13शुभ
चर01:13 – 02:31सामान्य
रोग02:31 – 03:49टालें
काल03:49 – 05:07टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:0606:14दिन
सूर्य06:1407:22दिन
शुक्र07:2208:30दिन
बुध08:3009:38दिन
चंद्र09:3810:47दिन
शनि10:4711:55दिन
गुरु11:5513:03दिन
मंगल13:0314:11दिन
सूर्य14:1115:19दिन
शुक्र15:1916:27दिन
बुध16:2717:35दिन
चंद्र17:3518:43दिन
शनि18:4319:35रात
गुरु19:3520:27रात
मंगल20:2721:19रात
सूर्य21:1922:11रात
शुक्र22:1123:03रात
बुध23:0323:55रात
चंद्र23:5500:47रात
शनि00:4701:39रात
गुरु01:3902:31रात
मंगल02:3103:23रात
सूर्य03:2304:15रात
शुक्र04:1505:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 जुल॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 जुल॰ 2027कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2027आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
22 जुल॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जुल॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जुल॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 अग॰ 2027श्रावण अमावस्याअमावस्या
5 अग॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2416° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।