18 फ़रवरी 2028 को पटना का पंचांग

शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2028, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2028 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (02:24, 19 फ़र॰ तक), नक्षत्र अनुराधा (13:25 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:22 पर और सूर्यास्त 17:44 पर है। राहुकाल 10:38 से 12:03 तक है।

दिन और रात
दिन 06:22 – 17:44
रात 06:21 तक
तिथि
नवमी, 02:24 तक
दशमी
नक्षत्र
अनुराधा, 13:25 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 फ़रवरी 2028 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण नवमी 02:24, 19 फ़र॰ तक
कृष्ण दशमी 03:48, 20 फ़र॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 15:01, 19 फ़र॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 16:29 तक
हर्षण 16:13, 19 फ़र॰ तक
करण
तैतिल 13:57 तक
गर 02:24, 19 फ़र॰ तक
वणिज 15:01, 19 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:22
सूर्यास्त
17:44
चंद्रोदय
00:58
चंद्रास्त
11:34
दिनमान
11h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:41 – 05:32
अभिजीत मुहूर्त
11:40 – 12:26

अशुभ समय

राहुकाल
10:38 – 12:03
यमगंड
14:53 – 16:19
गुलिक काल
07:47 – 09:13

18 फ़रवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:22 – 07:47सामान्य
लाभ07:47 – 09:13शुभ
अमृत09:13 – 10:38शुभ
काल10:38 – 12:03टालें
शुभ12:03 – 13:28शुभ
रोग13:28 – 14:53टालें
उद्वेग14:53 – 16:19टालें
चर16:19 – 17:44सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:44 – 19:19टालें
काल19:19 – 20:53टालें
लाभ20:53 – 22:28शुभ
उद्वेग22:28 – 00:03टालें
शुभ00:03 – 01:37शुभ
अमृत01:37 – 03:12शुभ
चर03:12 – 04:47सामान्य
रोग04:47 – 06:21टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:2207:19दिन
बुध07:1908:16दिन
चंद्र08:1609:13दिन
शनि09:1310:09दिन
गुरु10:0911:06दिन
मंगल11:0612:03दिन
सूर्य12:0313:00दिन
शुक्र13:0013:57दिन
बुध13:5714:53दिन
चंद्र14:5315:50दिन
शनि15:5016:47दिन
गुरु16:4717:44दिन
मंगल17:4418:47रात
सूर्य18:4719:50रात
शुक्र19:5020:53रात
बुध20:5321:56रात
चंद्र21:5623:00रात
शनि23:0000:03रात
गुरु00:0301:06रात
मंगल01:0602:09रात
सूर्य02:0903:12रात
शुक्र03:1204:15रात
बुध04:1505:18रात
चंद्र05:1806:21रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 फ़र॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 फ़र॰ 2028फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
29 फ़र॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 मार्च 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 मार्च 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 मार्च 2028फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 मार्च 2028मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2500° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।