11 दिसंबर 2028 को पटना का पंचांग

सोमवार, 11 दिसंबर 2028, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 11 दिसंबर 2028 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (17:33 तक), नक्षत्र हस्त (13:34 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:25 पर और सूर्यास्त 16:59 पर है। राहुकाल 07:44 से 09:04 तक है।

दिन और रात
दिन 06:25 – 16:59
रात 06:26 तक
तिथि
दशमी, 17:33 तक
एकादशी
नक्षत्र
हस्त, 13:34 तक
चित्रा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 दिसंबर 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण दशमी 17:33 तक
कृष्ण एकादशी 15:13, 12 दिस॰ तक
नक्षत्र
हस्त 13:34 तक
चित्रा 11:55, 12 दिस॰ तक
योग
सौभाग्य 20:32 तक
शोभन 17:25, 12 दिस॰ तक
करण
वणिज 06:43 तक
विष्टि (भद्रा) 17:33 तक
बव 04:23, 12 दिस॰ तक
बालव 15:13, 12 दिस॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 00:44, 12 दिस॰ तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:25
सूर्यास्त
16:59
चंद्रोदय
01:16
चंद्रास्त
12:59
दिनमान
10h 34m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:38 – 05:31
अभिजीत मुहूर्त
11:21 – 12:03

अशुभ समय

राहुकाल
07:44 – 09:04
यमगंड
10:23 – 11:42
गुलिक काल
13:02 – 14:21

11 दिसंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:25 – 07:44शुभ
काल07:44 – 09:04टालें
शुभ09:04 – 10:23शुभ
रोग10:23 – 11:42टालें
उद्वेग11:42 – 13:02टालें
चर13:02 – 14:21सामान्य
लाभ14:21 – 15:40शुभ
अमृत15:40 – 16:59शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर16:59 – 18:40सामान्य
रोग18:40 – 20:21टालें
काल20:21 – 22:02टालें
लाभ22:02 – 23:43शुभ
उद्वेग23:43 – 01:23टालें
शुभ01:23 – 03:04शुभ
अमृत03:04 – 04:45शुभ
चर04:45 – 06:26सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:2507:18दिन
शनि07:1808:11दिन
गुरु08:1109:04दिन
मंगल09:0409:57दिन
सूर्य09:5710:49दिन
शुक्र10:4911:42दिन
बुध11:4212:35दिन
चंद्र12:3513:28दिन
शनि13:2814:21दिन
गुरु14:2115:14दिन
मंगल15:1416:07दिन
सूर्य16:0716:59दिन
शुक्र16:5918:07रात
बुध18:0719:14रात
चंद्र19:1420:21रात
शनि20:2121:28रात
गुरु21:2822:35रात
मंगल22:3523:43रात
सूर्य23:4300:50रात
शुक्र00:5001:57रात
बुध01:5703:04रात
चंद्र03:0404:11रात
शनि04:1105:19रात
गुरु05:1906:26रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 दिस॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 दिस॰ 2028धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
16 दिस॰ 2028पौष अमावस्याअमावस्या
20 दिस॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 दिस॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 दिस॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
4 जन॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 जन॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2614° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।