28 जुलाई 2029 को पटना का पंचांग

शनिवार, 28 जुलाई 2029, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 28 जुलाई 2029 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (19:50 तक), नक्षत्र शतभिषा (00:37, 29 जुल॰ तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 05:14 पर और सूर्यास्त 18:37 पर है। राहुकाल 08:34 से 10:15 तक है।

दिन और रात
दिन 05:14 – 18:37
रात 05:14 तक
तिथि
तृतीया, 19:50 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
शतभिषा, 00:37 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 जुलाई 2029 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 19:50 तक
कृष्ण चतुर्थी 21:10, 29 जुल॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 00:37, 29 जुल॰ तक
पूर्वा भाद्रपद 02:42, 30 जुल॰ तक
योग
सौभाग्य 09:39 तक
शोभन 09:34, 29 जुल॰ तक
करण
वणिज 07:22 तक
विष्टि (भद्रा) 19:50 तक
बव 08:26, 29 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:14
सूर्यास्त
18:37
चंद्रोदय
20:14
चंद्रास्त
07:36
दिनमान
13h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:49 – 04:31
अभिजीत मुहूर्त
11:29 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
08:34 – 10:15
यमगंड
13:36 – 15:16
गुलिक काल
05:14 – 06:54

28 जुलाई 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:14 – 06:54टालें
शुभ06:54 – 08:34शुभ
रोग08:34 – 10:15टालें
उद्वेग10:15 – 11:55टालें
चर11:55 – 13:36सामान्य
लाभ13:36 – 15:16शुभ
अमृत15:16 – 16:57शुभ
काल16:57 – 18:37टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:37 – 19:57शुभ
उद्वेग19:57 – 21:16टालें
शुभ21:16 – 22:36शुभ
अमृत22:36 – 23:56शुभ
चर23:56 – 01:15सामान्य
रोग01:15 – 02:35टालें
काल02:35 – 03:54टालें
लाभ03:54 – 05:14शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:1406:21दिन
गुरु06:2107:28दिन
मंगल07:2808:34दिन
सूर्य08:3409:41दिन
शुक्र09:4110:48दिन
बुध10:4811:55दिन
चंद्र11:5513:02दिन
शनि13:0214:09दिन
गुरु14:0915:16दिन
मंगल15:1616:23दिन
सूर्य16:2317:30दिन
शुक्र17:3018:37दिन
बुध18:3719:30रात
चंद्र19:3020:23रात
शनि20:2321:16रात
गुरु21:1622:09रात
मंगल22:0923:02रात
सूर्य23:0223:56रात
शुक्र23:5600:49रात
बुध00:4901:42रात
चंद्र01:4202:35रात
शनि02:3503:28रात
गुरु03:2804:21रात
मंगल04:2105:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 जुल॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 अग॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अग॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अग॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अग॰ 2029श्रावण अमावस्याअमावस्या
13 अग॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अग॰ 2029सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अग॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 अग॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 अग॰ 2029श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2701° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।