27 जुलाई 2029 को पटना का पंचांग

शुक्रवार, 27 जुलाई 2029, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 27 जुलाई 2029 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (19:02 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (23:05 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:13 पर और सूर्यास्त 18:38 पर है। राहुकाल 10:15 से 11:55 तक है।

दिन और रात
दिन 05:13 – 18:38
रात 05:14 तक
तिथि
द्वितीया, 19:02 तक
तृतीया
नक्षत्र
धनिष्ठा, 23:05 तक
शतभिषा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 जुलाई 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 19:02 तक
कृष्ण तृतीया 19:50, 28 जुल॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 00:37, 29 जुल॰ तक
योग
आयुष्मान 10:10 तक
सौभाग्य 09:39, 28 जुल॰ तक
करण
तैतिल 06:51 तक
गर 19:02 तक
वणिज 07:22, 28 जुल॰ तक
चंद्र राशि
मकर 10:31 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:13
सूर्यास्त
18:38
चंद्रोदय
19:41
चंद्रास्त
06:41
दिनमान
13h 24m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:48 – 04:31
अभिजीत मुहूर्त
11:29 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
10:15 – 11:55
यमगंड
15:16 – 16:57
गुलिक काल
06:54 – 08:34

27 जुलाई 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:13 – 06:54सामान्य
लाभ06:54 – 08:34शुभ
अमृत08:34 – 10:15शुभ
काल10:15 – 11:55टालें
शुभ11:55 – 13:36शुभ
रोग13:36 – 15:16टालें
उद्वेग15:16 – 16:57टालें
चर16:57 – 18:38सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:38 – 19:57टालें
काल19:57 – 21:17टालें
लाभ21:17 – 22:36शुभ
उद्वेग22:36 – 23:56टालें
शुभ23:56 – 01:15शुभ
अमृत01:15 – 02:35शुभ
चर02:35 – 03:54सामान्य
रोग03:54 – 05:14टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:1306:20दिन
बुध06:2007:27दिन
चंद्र07:2708:34दिन
शनि08:3409:41दिन
गुरु09:4110:48दिन
मंगल10:4811:55दिन
सूर्य11:5513:02दिन
शुक्र13:0214:09दिन
बुध14:0915:16दिन
चंद्र15:1616:23दिन
शनि16:2317:30दिन
गुरु17:3018:38दिन
मंगल18:3819:31रात
सूर्य19:3120:24रात
शुक्र20:2421:17रात
बुध21:1722:10रात
चंद्र22:1023:03रात
शनि23:0323:56रात
गुरु23:5600:49रात
मंगल00:4901:42रात
सूर्य01:4202:35रात
शुक्र02:3503:28रात
बुध03:2804:21रात
चंद्र04:2105:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 जुल॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 अग॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अग॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अग॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अग॰ 2029श्रावण अमावस्याअमावस्या
13 अग॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अग॰ 2029सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अग॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 अग॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 अग॰ 2029श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2701° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।