5 अगस्त 2029 को पटना का पंचांग

रविवार, 5 अगस्त 2029, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 5 अगस्त 2029 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (09:35 तक), नक्षत्र रोहिणी (18:26 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:18 पर और सूर्यास्त 18:32 पर है। राहुकाल 16:53 से 18:32 तक है।

दिन और रात
दिन 05:18 – 18:32
रात 05:18 तक
तिथि
दशमी, 09:35 तक
एकादशी
नक्षत्र
रोहिणी, 18:26 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 अगस्त 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण दशमी 09:35 तक
कृष्ण एकादशी 10:33, 6 अग॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 18:26 तक
मृगशिरा 19:48, 6 अग॰ तक
योग
ध्रुव 14:02 तक
व्याघातअशुभ 13:44, 6 अग॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 09:35 तक
बव 22:09 तक
बालव 10:33, 6 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:18
सूर्यास्त
18:32
चंद्रोदय
00:31
चंद्रास्त
14:38
दिनमान
13h 15m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:52 – 04:35
अभिजीत मुहूर्त
11:28 – 12:21

अशुभ समय

राहुकाल
16:53 – 18:32
यमगंड
11:55 – 13:34
गुलिक काल
15:13 – 16:53

5 अगस्त 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:18 – 06:57टालें
चर06:57 – 08:36सामान्य
लाभ08:36 – 10:15शुभ
अमृत10:15 – 11:55शुभ
काल11:55 – 13:34टालें
शुभ13:34 – 15:13शुभ
रोग15:13 – 16:53टालें
उद्वेग16:53 – 18:32टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:32 – 19:53शुभ
अमृत19:53 – 21:14शुभ
चर21:14 – 22:34सामान्य
रोग22:34 – 23:55टालें
काल23:55 – 01:16टालें
लाभ01:16 – 02:37शुभ
उद्वेग02:37 – 03:57टालें
शुभ03:57 – 05:18शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:1806:24दिन
शुक्र06:2407:30दिन
बुध07:3008:36दिन
चंद्र08:3609:42दिन
शनि09:4210:49दिन
गुरु10:4911:55दिन
मंगल11:5513:01दिन
सूर्य13:0114:07दिन
शुक्र14:0715:13दिन
बुध15:1316:20दिन
चंद्र16:2017:26दिन
शनि17:2618:32दिन
गुरु18:3219:26रात
मंगल19:2620:20रात
सूर्य20:2021:14रात
शुक्र21:1422:07रात
बुध22:0723:01रात
चंद्र23:0123:55रात
शनि23:5500:49रात
गुरु00:4901:43रात
मंगल01:4302:37रात
सूर्य02:3703:30रात
शुक्र03:3004:24रात
बुध04:2405:18रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 अग॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अग॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अग॰ 2029श्रावण अमावस्याअमावस्या
13 अग॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अग॰ 2029सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अग॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 अग॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 अग॰ 2029श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
28 अग॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 सित॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2704° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।