28 अक्टूबर 2049 को पटना का पंचांग

गुरुवार, 28 अक्टूबर 2049, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 28 अक्टूबर 2049 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (19:58 तक), नक्षत्र विशाखा (16:56 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:55 पर और सूर्यास्त 17:10 पर है। राहुकाल 12:57 से 14:21 तक है।

दिन और रात
दिन 05:55 – 17:10
रात 05:55 तक
तिथि
द्वितीया, 19:58 तक
तृतीया
नक्षत्र
विशाखा, 16:56 तक
अनुराधा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 अक्टूबर 2049 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 19:58 तक
शुक्ल तृतीया 18:33, 29 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 16:56 तक
अनुराधा 16:15, 29 अक्टू॰ तक
योग
आयुष्मान 09:56 तक
सौभाग्य 07:45, 29 अक्टू॰ तक
करण
बालव 08:33 तक
कौलव 19:58 तक
तैतिल 07:18, 29 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
तुला 11:04 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:55
सूर्यास्त
17:10
चंद्रोदय
07:20
चंद्रास्त
18:25
दिनमान
11h 16m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2106
शक संवत
1971, शुक्ल संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:13 – 05:04
अभिजीत मुहूर्त
11:10 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
12:57 – 14:21
यमगंड
05:55 – 07:19
गुलिक काल
08:44 – 10:08

28 अक्टूबर 2049 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:55 – 07:19शुभ
रोग07:19 – 08:44टालें
उद्वेग08:44 – 10:08टालें
चर10:08 – 11:33सामान्य
लाभ11:33 – 12:57शुभ
अमृत12:57 – 14:21शुभ
काल14:21 – 15:46टालें
शुभ15:46 – 17:10शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:10 – 18:46शुभ
चर18:46 – 20:22सामान्य
रोग20:22 – 21:57टालें
काल21:57 – 23:33टालें
लाभ23:33 – 01:08शुभ
उद्वेग01:08 – 02:44टालें
शुभ02:44 – 04:20शुभ
अमृत04:20 – 05:55शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:5506:51दिन
मंगल06:5107:47दिन
सूर्य07:4708:44दिन
शुक्र08:4409:40दिन
बुध09:4010:36दिन
चंद्र10:3611:33दिन
शनि11:3312:29दिन
गुरु12:2913:25दिन
मंगल13:2514:21दिन
सूर्य14:2115:18दिन
शुक्र15:1816:14दिन
बुध16:1417:10दिन
चंद्र17:1018:14रात
शनि18:1419:18रात
गुरु19:1820:22रात
मंगल20:2221:25रात
सूर्य21:2522:29रात
शुक्र22:2923:33रात
बुध23:3300:37रात
चंद्र00:3701:40रात
शनि01:4002:44रात
गुरु02:4403:48रात
मंगल03:4804:52रात
सूर्य04:5205:55रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 अक्टू॰ 2049विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 नव॰ 2049शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 नव॰ 2049प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 नव॰ 2049कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
13 नव॰ 2049संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 नव॰ 2049वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2049कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 नव॰ 2049कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 नव॰ 2049प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 नव॰ 2049मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.5531° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।