26 दिसंबर 2024 को पर्थ का पंचांग

गुरुवार, 26 दिसंबर 2024, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

गुरुवार, 26 दिसंबर 2024 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (03:14, 27 दिस॰ तक), नक्षत्र स्वाति (20:39 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 05:10 पर और सूर्यास्त 19:24 पर है। राहुकाल 14:03 से 15:50 तक है।

दिन और रात
दिन 05:10 – 19:24
रात 05:10 तक
तिथि
एकादशी, 03:14 तक
द्वादशी
नक्षत्र
स्वाति, 20:39 तक
विशाखा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 दिसंबर 2024 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 03:14, 27 दिस॰ तक
कृष्ण द्वादशी 04:57, 28 दिस॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 20:39 तक
विशाखा 22:58, 27 दिस॰ तक
योग
सुकर्मा 00:53, 27 दिस॰ तक
धृति 01:07, 28 दिस॰ तक
करण
बव 14:10 तक
बालव 03:14, 27 दिस॰ तक
कौलव 16:10, 27 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:10
सूर्यास्त
19:24
चंद्रोदय
01:23
चंद्रास्त
15:14
दिनमान
14h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:51 – 04:30
अभिजीत मुहूर्त
11:48 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
14:03 – 15:50
यमगंड
05:10 – 06:56
गुलिक काल
08:43 – 10:30

26 दिसंबर 2024 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:10 – 06:56शुभ
रोग06:56 – 08:43टालें
उद्वेग08:43 – 10:30टालें
चर10:30 – 12:17सामान्य
लाभ12:17 – 14:03शुभ
अमृत14:03 – 15:50शुभ
काल15:50 – 17:37टालें
शुभ17:37 – 19:24शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:24 – 20:37शुभ
चर20:37 – 21:50सामान्य
रोग21:50 – 23:04टालें
काल23:04 – 00:17टालें
लाभ00:17 – 01:30शुभ
उद्वेग01:30 – 02:44टालें
शुभ02:44 – 03:57शुभ
अमृत03:57 – 05:10शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:1006:21दिन
मंगल06:2107:32दिन
सूर्य07:3208:43दिन
शुक्र08:4309:54दिन
बुध09:5411:05दिन
चंद्र11:0512:17दिन
शनि12:1713:28दिन
गुरु13:2814:39दिन
मंगल14:3915:50दिन
सूर्य15:5017:01दिन
शुक्र17:0118:13दिन
बुध18:1319:24दिन
चंद्र19:2420:13रात
शनि20:1321:01रात
गुरु21:0121:50रात
मंगल21:5022:39रात
सूर्य22:3923:28रात
शुक्र23:2800:17रात
बुध00:1701:06रात
चंद्र01:0601:55रात
शनि01:5502:44रात
गुरु02:4403:32रात
मंगल03:3204:21रात
सूर्य04:2105:10रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 दिस॰ 2024कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 दिस॰ 2024प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
31 दिस॰ 2024पौष अमावस्याअमावस्या
3 जन॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 जन॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 जन॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 जन॰ 2025पौष पूर्णिमापूर्णिमा
14 जन॰ 2025मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2061° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।