5 फ़रवरी 2025 को पर्थ का पंचांग

बुधवार, 5 फ़रवरी 2025, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

बुधवार, 5 फ़रवरी 2025 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (03:06, 6 फ़र॰ तक), नक्षत्र भरणी (23:03 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:45 पर और सूर्यास्त 19:15 पर है। राहुकाल 12:30 से 14:11 तक है।

दिन और रात
दिन 05:45 – 19:15
रात 05:46 तक
तिथि
अष्टमी, 03:06 तक
नवमी
नक्षत्र
भरणी, 23:03 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 फ़रवरी 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 03:06, 6 फ़र॰ तक
शुक्ल नवमी 01:23, 7 फ़र॰ तक
नक्षत्र
भरणी 23:03 तक
कृत्तिका 21:59, 6 फ़र॰ तक
योग
शुक्ल 23:48 तक
ब्रह्म 21:11, 6 फ़र॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 16:02 तक
बव 03:06, 6 फ़र॰ तक
बालव 14:13, 6 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
मेष 04:46, 6 फ़र॰ तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:45
सूर्यास्त
19:15
चंद्रोदय
12:52
चंद्रास्त
23:23
दिनमान
13h 30m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:21 – 05:03
अभिजीत मुहूर्त
12:03 – 12:57 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:30 – 14:11
यमगंड
07:26 – 09:07
गुलिक काल
10:49 – 12:30

5 फ़रवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:45 – 07:26शुभ
अमृत07:26 – 09:07शुभ
काल09:07 – 10:49टालें
शुभ10:49 – 12:30शुभ
रोग12:30 – 14:11टालें
उद्वेग14:11 – 15:52टालें
चर15:52 – 17:34सामान्य
लाभ17:34 – 19:15शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:15 – 20:34टालें
शुभ20:34 – 21:53शुभ
अमृत21:53 – 23:11शुभ
चर23:11 – 00:30सामान्य
रोग00:30 – 01:49टालें
काल01:49 – 03:08टालें
लाभ03:08 – 04:27शुभ
उद्वेग04:27 – 05:46टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4506:52दिन
चंद्र06:5208:00दिन
शनि08:0009:07दिन
गुरु09:0710:15दिन
मंगल10:1511:22दिन
सूर्य11:2212:30दिन
शुक्र12:3013:37दिन
बुध13:3714:45दिन
चंद्र14:4515:52दिन
शनि15:5217:00दिन
गुरु17:0018:07दिन
मंगल18:0719:15दिन
सूर्य19:1520:07रात
शुक्र20:0721:00रात
बुध21:0021:53रात
चंद्र21:5322:45रात
शनि22:4523:38रात
गुरु23:3800:30रात
मंगल00:3001:23रात
सूर्य01:2302:15रात
शुक्र02:1503:08रात
बुध03:0804:01रात
चंद्र04:0104:53रात
शनि04:5305:46रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2025माघ पूर्णिमापूर्णिमा
13 फ़र॰ 2025कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 फ़र॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 फ़र॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 फ़र॰ 2025फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
3 मार्च 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2076° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।