6 सितंबर 2025 को पर्थ का पंचांग

शनिवार, 6 सितंबर 2025, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

शनिवार, 6 सितंबर 2025 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (04:11, 7 सित॰ तक), नक्षत्र धनिष्ठा (01:25, 7 सित॰ तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:27 पर और सूर्यास्त 18:03 पर है। राहुकाल 09:21 से 10:48 तक है।

दिन और रात
दिन 06:27 – 18:03
रात 06:25 तक
तिथि
चतुर्दशी, 04:11 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
धनिष्ठा, 01:25 तक
शतभिषा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 सितंबर 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 04:11, 7 सित॰ तक
पूर्णिमा 02:08, 8 सित॰ तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 01:25, 7 सित॰ तक
शतभिषा 00:11, 8 सित॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 14:21 तक
सुकर्मा 11:52, 7 सित॰ तक
करण
गर 17:01 तक
वणिज 04:11, 7 सित॰ तक
विष्टि (भद्रा) 15:13, 7 सित॰ तक
चंद्र राशि
मकर 13:51 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:27
सूर्यास्त
18:03
चंद्रोदय
16:31
चंद्रास्त
05:30
दिनमान
11h 36m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:47 – 05:37
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:38

अशुभ समय

राहुकाल
09:21 – 10:48
यमगंड
13:42 – 15:09
गुलिक काल
06:27 – 07:54

6 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:27 – 07:54टालें
शुभ07:54 – 09:21शुभ
रोग09:21 – 10:48टालें
उद्वेग10:48 – 12:15टालें
चर12:15 – 13:42सामान्य
लाभ13:42 – 15:09शुभ
अमृत15:09 – 16:36शुभ
काल16:36 – 18:03टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:03 – 19:35शुभ
उद्वेग19:35 – 21:08टालें
शुभ21:08 – 22:41शुभ
अमृत22:41 – 00:14शुभ
चर00:14 – 01:47सामान्य
रोग01:47 – 03:20टालें
काल03:20 – 04:53टालें
लाभ04:53 – 06:25शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:2707:25दिन
गुरु07:2508:23दिन
मंगल08:2309:21दिन
सूर्य09:2110:19दिन
शुक्र10:1911:17दिन
बुध11:1712:15दिन
चंद्र12:1513:13दिन
शनि13:1314:11दिन
गुरु14:1115:09दिन
मंगल15:0916:07दिन
सूर्य16:0717:05दिन
शुक्र17:0518:03दिन
बुध18:0319:05रात
चंद्र19:0520:06रात
शनि20:0621:08रात
गुरु21:0822:10रात
मंगल22:1023:12रात
सूर्य23:1200:14रात
शुक्र00:1401:16रात
बुध01:1602:18रात
चंद्र02:1803:20रात
शनि03:2004:22रात
गुरु04:2205:24रात
मंगल05:2406:25रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 सित॰ 2025भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
11 सित॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 सित॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 सित॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 सित॰ 2025कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 सित॰ 2025आश्विन अमावस्याअमावस्या
26 सित॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2158° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।