24 सितंबर 2025 को पर्थ का पंचांग

बुधवार, 24 सितंबर 2025, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

बुधवार, 24 सितंबर 2025 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (07:22 तक), नक्षत्र चित्रा (18:46 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 06:03 पर और सूर्यास्त 18:14 पर है। राहुकाल 12:08 से 13:40 तक है।

दिन और रात
दिन 06:03 – 18:14
रात 06:02 तक
तिथि
तृतीया
नक्षत्र
चित्रा, 18:46 तक
स्वाति
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 सितंबर 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 07:22 तक
शुक्ल तृतीया 09:36, 25 सित॰ तक
नक्षत्र
चित्रा 18:46 तक
स्वाति 21:38, 25 सित॰ तक
योग
इंद्र 23:32 तक
वैधृतिअशुभ 00:23, 26 सित॰ तक
करण
कौलव 07:22 तक
तैतिल 20:27 तक
गर 09:36, 25 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:03
सूर्यास्त
18:14
चंद्रोदय
07:00
चंद्रास्त
20:34
दिनमान
12h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:28 – 05:16
अभिजीत मुहूर्त
11:44 – 12:33 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:08 – 13:40
यमगंड
07:34 – 09:06
गुलिक काल
10:37 – 12:08

24 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:03 – 07:34शुभ
अमृत07:34 – 09:06शुभ
काल09:06 – 10:37टालें
शुभ10:37 – 12:08शुभ
रोग12:08 – 13:40टालें
उद्वेग13:40 – 15:11टालें
चर15:11 – 16:42सामान्य
लाभ16:42 – 18:14शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:14 – 19:42टालें
शुभ19:42 – 21:11शुभ
अमृत21:11 – 22:39शुभ
चर22:39 – 00:08सामान्य
रोग00:08 – 01:36टालें
काल01:36 – 03:05टालें
लाभ03:05 – 04:33शुभ
उद्वेग04:33 – 06:02टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:0307:04दिन
चंद्र07:0408:05दिन
शनि08:0509:06दिन
गुरु09:0610:07दिन
मंगल10:0711:07दिन
सूर्य11:0712:08दिन
शुक्र12:0813:09दिन
बुध13:0914:10दिन
चंद्र14:1015:11दिन
शनि15:1116:12दिन
गुरु16:1217:13दिन
मंगल17:1318:14दिन
सूर्य18:1419:13रात
शुक्र19:1320:12रात
बुध20:1221:11रात
चंद्र21:1122:10रात
शनि22:1023:09रात
गुरु23:0900:08रात
मंगल00:0801:07रात
सूर्य01:0702:06रात
शुक्र02:0603:05रात
बुध03:0504:04रात
चंद्र04:0405:03रात
शनि05:0306:02रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 सित॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अक्टू॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2025तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2025कार्तिक अमावस्याअमावस्या

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2165° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।