16 अक्टूबर 2025 को पर्थ का पंचांग

गुरुवार, 16 अक्टूबर 2025, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

गुरुवार, 16 अक्टूबर 2025 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (13:06 तक), नक्षत्र आश्लेषा (15:12 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 05:35 पर और सूर्यास्त 18:28 पर है। राहुकाल 13:39 से 15:15 तक है।

दिन और रात
दिन 05:35 – 18:28
रात 05:34 तक
तिथि
दशमी, 13:06 तक
एकादशी
नक्षत्र
आश्लेषा, 15:12 तक
मघा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण दशमी 13:06 तक
कृष्ण एकादशी 13:42, 17 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मघा 16:27, 17 अक्टू॰ तक
योग
शुभ 04:40, 17 अक्टू॰ तक
शुक्ल 04:18, 18 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 13:06 तक
बव 01:20, 17 अक्टू॰ तक
बालव 13:42, 17 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 15:12 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:35
सूर्यास्त
18:28
चंद्रोदय
02:49
चंद्रास्त
13:41
दिनमान
12h 53m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:06 – 04:51
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:28

अशुभ समय

राहुकाल
13:39 – 15:15
यमगंड
05:35 – 07:12
गुलिक काल
08:49 – 10:25

16 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:35 – 07:12शुभ
रोग07:12 – 08:49टालें
उद्वेग08:49 – 10:25टालें
चर10:25 – 12:02सामान्य
लाभ12:02 – 13:39शुभ
अमृत13:39 – 15:15शुभ
काल15:15 – 16:52टालें
शुभ16:52 – 18:28शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:28 – 19:52शुभ
चर19:52 – 21:15सामान्य
रोग21:15 – 22:38टालें
काल22:38 – 00:01टालें
लाभ00:01 – 01:25शुभ
उद्वेग01:25 – 02:48टालें
शुभ02:48 – 04:11शुभ
अमृत04:11 – 05:34शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:3506:40दिन
मंगल06:4007:44दिन
सूर्य07:4408:49दिन
शुक्र08:4909:53दिन
बुध09:5310:57दिन
चंद्र10:5712:02दिन
शनि12:0213:06दिन
गुरु13:0614:11दिन
मंगल14:1115:15दिन
सूर्य15:1516:20दिन
शुक्र16:2017:24दिन
बुध17:2418:28दिन
चंद्र18:2819:24रात
शनि19:2420:19रात
गुरु20:1921:15रात
मंगल21:1522:10रात
सूर्य22:1023:06रात
शुक्र23:0600:01रात
बुध00:0100:57रात
चंद्र00:5701:52रात
शनि01:5202:48रात
गुरु02:4803:43रात
मंगल03:4304:39रात
सूर्य04:3905:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 अक्टू॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2025तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2025कार्तिक अमावस्याअमावस्या
25 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
9 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2173° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।