8 नवंबर 2025 को पर्थ का पंचांग

शनिवार, 8 नवंबर 2025, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

शनिवार, 8 नवंबर 2025 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (10:02 तक), नक्षत्र मृगशिरा (00:32, 9 नव॰ तक) और योग शिव है। सूर्योदय 05:13 पर और सूर्यास्त 18:47 पर है। राहुकाल 08:36 से 10:18 तक है।

दिन और रात
दिन 05:13 – 18:47
रात 05:12 तक
तिथि
तृतीया, 10:02 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
मृगशिरा, 00:32 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 नवंबर 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 10:02 तक
कृष्ण चतुर्थी 06:56, 9 नव॰ तक
नक्षत्र
मृगशिरा 00:32, 9 नव॰ तक
आर्द्रा 22:34, 9 नव॰ तक
योग
शिव 21:01 तक
सिद्ध 17:32, 9 नव॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 10:02 तक
बव 20:25 तक
बालव 06:56, 9 नव॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 13:44 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:13
सूर्यास्त
18:47
चंद्रोदय
22:22
चंद्रास्त
07:03
दिनमान
13h 34m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:49 – 04:31
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
08:36 – 10:18
यमगंड
13:42 – 15:24
गुलिक काल
05:13 – 06:55

8 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:13 – 06:55टालें
शुभ06:55 – 08:36शुभ
रोग08:36 – 10:18टालें
उद्वेग10:18 – 12:00टालें
चर12:00 – 13:42सामान्य
लाभ13:42 – 15:24शुभ
अमृत15:24 – 17:05शुभ
काल17:05 – 18:47टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:47 – 20:05शुभ
उद्वेग20:05 – 21:23टालें
शुभ21:23 – 22:42शुभ
अमृत22:42 – 00:00शुभ
चर00:00 – 01:18सामान्य
रोग01:18 – 02:36टालें
काल02:36 – 03:54टालें
लाभ03:54 – 05:12शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:1306:21दिन
गुरु06:2107:29दिन
मंगल07:2908:36दिन
सूर्य08:3609:44दिन
शुक्र09:4410:52दिन
बुध10:5212:00दिन
चंद्र12:0013:08दिन
शनि13:0814:16दिन
गुरु14:1615:24दिन
मंगल15:2416:31दिन
सूर्य16:3117:39दिन
शुक्र17:3918:47दिन
बुध18:4719:39रात
चंद्र19:3920:31रात
शनि20:3121:23रात
गुरु21:2322:15रात
मंगल22:1523:08रात
सूर्य23:0800:00रात
शुक्र00:0000:52रात
बुध00:5201:44रात
चंद्र01:4402:36रात
शनि02:3603:28रात
गुरु03:2804:20रात
मंगल04:2005:12रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
24 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 दिस॰ 2025मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2182° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।