7 नवंबर 2025 को पर्थ का पंचांग

शुक्रवार, 7 नवंबर 2025, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

शुक्रवार, 7 नवंबर 2025 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (13:35 तक), नक्षत्र कृत्तिका (05:57 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:14 पर और सूर्यास्त 18:46 पर है। राहुकाल 10:18 से 12:00 तक है।

दिन और रात
दिन 05:14 – 18:46
रात 05:13 तक
तिथि
द्वितीया, 13:35 तक
तृतीया
नक्षत्र
रोहिणी, 03:03 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 नवंबर 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 13:35 तक
कृष्ण तृतीया 10:02, 8 नव॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 03:03, 8 नव॰ तक
मृगशिरा 00:32, 9 नव॰ तक
योग
परिघअशुभ 00:57, 8 नव॰ तक
शिव 21:01, 8 नव॰ तक
करण
गर 13:35 तक
वणिज 23:46 तक
विष्टि (भद्रा) 10:02, 8 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:14
सूर्यास्त
18:46
चंद्रोदय
21:12
चंद्रास्त
06:04
दिनमान
13h 33m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:50 – 04:32
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
10:18 – 12:00
यमगंड
15:23 – 17:05
गुलिक काल
06:55 – 08:37

7 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:14 – 06:55सामान्य
लाभ06:55 – 08:37शुभ
अमृत08:37 – 10:18शुभ
काल10:18 – 12:00टालें
शुभ12:00 – 13:42शुभ
रोग13:42 – 15:23टालें
उद्वेग15:23 – 17:05टालें
चर17:05 – 18:46सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:46 – 20:05टालें
काल20:05 – 21:23टालें
लाभ21:23 – 22:41शुभ
उद्वेग22:41 – 00:00टालें
शुभ00:00 – 01:18शुभ
अमृत01:18 – 02:36शुभ
चर02:36 – 03:55सामान्य
रोग03:55 – 05:13टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:1406:21दिन
बुध06:2107:29दिन
चंद्र07:2908:37दिन
शनि08:3709:45दिन
गुरु09:4510:52दिन
मंगल10:5212:00दिन
सूर्य12:0013:08दिन
शुक्र13:0814:15दिन
बुध14:1515:23दिन
चंद्र15:2316:31दिन
शनि16:3117:39दिन
गुरु17:3918:46दिन
मंगल18:4619:38रात
सूर्य19:3820:31रात
शुक्र20:3121:23रात
बुध21:2322:15रात
चंद्र22:1523:07रात
शनि23:0700:00रात
गुरु00:0000:52रात
मंगल00:5201:44रात
सूर्य01:4402:36रात
शुक्र02:3603:28रात
बुध03:2804:21रात
चंद्र04:2105:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
24 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 दिस॰ 2025मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2182° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।