25 दिसंबर 2025 को पर्थ का पंचांग

गुरुवार, 25 दिसंबर 2025, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

गुरुवार, 25 दिसंबर 2025 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (16:13 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (10:48 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:09 पर और सूर्यास्त 19:23 पर है। राहुकाल 14:03 से 15:50 तक है।

दिन और रात
दिन 05:09 – 19:23
रात 05:09 तक
तिथि
पंचमी, 16:13 तक
षष्ठी
नक्षत्र
धनिष्ठा, 10:48 तक
शतभिषा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 दिसंबर 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 16:13 तक
शुक्ल षष्ठी 16:14, 26 दिस॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 11:30, 26 दिस॰ तक
योग
वज्रअशुभ 17:43 तक
सिद्धि 16:31, 26 दिस॰ तक
करण
बालव 16:13 तक
कौलव 04:17, 26 दिस॰ तक
तैतिल 16:14, 26 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:09
सूर्यास्त
19:23
चंद्रोदय
09:41
चंद्रास्त
22:58
दिनमान
14h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:51 – 04:30
अभिजीत मुहूर्त
11:48 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
14:03 – 15:50
यमगंड
05:09 – 06:56
गुलिक काल
08:42 – 10:29

25 दिसंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:09 – 06:56शुभ
रोग06:56 – 08:42टालें
उद्वेग08:42 – 10:29टालें
चर10:29 – 12:16सामान्य
लाभ12:16 – 14:03शुभ
अमृत14:03 – 15:50शुभ
काल15:50 – 17:36टालें
शुभ17:36 – 19:23शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:23 – 20:37शुभ
चर20:37 – 21:50सामान्य
रोग21:50 – 23:03टालें
काल23:03 – 00:16टालें
लाभ00:16 – 01:30शुभ
उद्वेग01:30 – 02:43टालें
शुभ02:43 – 03:56शुभ
अमृत03:56 – 05:09शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:0906:20दिन
मंगल06:2007:31दिन
सूर्य07:3108:42दिन
शुक्र08:4209:54दिन
बुध09:5411:05दिन
चंद्र11:0512:16दिन
शनि12:1613:27दिन
गुरु13:2714:38दिन
मंगल14:3815:50दिन
सूर्य15:5017:01दिन
शुक्र17:0118:12दिन
बुध18:1219:23दिन
चंद्र19:2320:12रात
शनि20:1221:01रात
गुरु21:0121:50रात
मंगल21:5022:39रात
सूर्य22:3923:27रात
शुक्र23:2700:16रात
बुध00:1601:05रात
चंद्र01:0501:54रात
शनि01:5402:43रात
गुरु02:4303:32रात
मंगल03:3204:21रात
सूर्य04:2105:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 जन॰ 2026पौष पूर्णिमापूर्णिमा
7 जन॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 जन॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 जन॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 जन॰ 2026मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 जन॰ 2026माघ अमावस्याअमावस्या
22 जन॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2200° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।