6 फ़रवरी 2026 को पर्थ का पंचांग

शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (03:49, 7 फ़र॰ तक), नक्षत्र हस्त (02:54, 7 फ़र॰ तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:45 पर और सूर्यास्त 19:14 पर है। राहुकाल 10:49 से 12:30 तक है।

दिन और रात
दिन 05:45 – 19:14
रात 05:46 तक
तिथि
पंचमी, 03:49 तक
षष्ठी
नक्षत्र
हस्त, 02:54 तक
चित्रा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 फ़रवरी 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 03:49, 7 फ़र॰ तक
कृष्ण षष्ठी 05:24, 8 फ़र॰ तक
नक्षत्र
हस्त 02:54, 7 फ़र॰ तक
चित्रा 04:58, 8 फ़र॰ तक
योग
धृति 02:07, 7 फ़र॰ तक
शूलअशुभ 02:10, 8 फ़र॰ तक
करण
कौलव 15:15 तक
तैतिल 03:49, 7 फ़र॰ तक
गर 16:32, 7 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:45
सूर्यास्त
19:14
चंद्रोदय
21:38
चंद्रास्त
09:53
दिनमान
13h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:21 – 05:03
अभिजीत मुहूर्त
12:03 – 12:57

अशुभ समय

राहुकाल
10:49 – 12:30
यमगंड
15:52 – 17:33
गुलिक काल
07:27 – 09:08

6 फ़रवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:45 – 07:27सामान्य
लाभ07:27 – 09:08शुभ
अमृत09:08 – 10:49शुभ
काल10:49 – 12:30टालें
शुभ12:30 – 14:11शुभ
रोग14:11 – 15:52टालें
उद्वेग15:52 – 17:33टालें
चर17:33 – 19:14सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:14 – 20:33टालें
काल20:33 – 21:52टालें
लाभ21:52 – 23:11शुभ
उद्वेग23:11 – 00:30टालें
शुभ00:30 – 01:49शुभ
अमृत01:49 – 03:08शुभ
चर03:08 – 04:27सामान्य
रोग04:27 – 05:46टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:4506:53दिन
बुध06:5308:00दिन
चंद्र08:0009:08दिन
शनि09:0810:15दिन
गुरु10:1511:22दिन
मंगल11:2212:30दिन
सूर्य12:3013:37दिन
शुक्र13:3714:45दिन
बुध14:4515:52दिन
चंद्र15:5216:59दिन
शनि16:5918:07दिन
गुरु18:0719:14दिन
मंगल19:1420:07रात
सूर्य20:0721:00रात
शुक्र21:0021:52रात
बुध21:5222:45रात
चंद्र22:4523:38रात
शनि23:3800:30रात
गुरु00:3001:23रात
मंगल01:2302:16रात
सूर्य02:1603:08रात
शुक्र03:0804:01रात
बुध04:0104:54रात
चंद्र04:5405:46रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 फ़र॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2026कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 फ़र॰ 2026फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
21 फ़र॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 फ़र॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 मार्च 2026फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
7 मार्च 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2216° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।