5 अक्टूबर 2026 को पर्थ का पंचांग

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (06:24 तक), नक्षत्र पुष्य (01:39, 6 अक्टू॰ तक) और योग शिव है। सूर्योदय 05:49 पर और सूर्यास्त 18:20 पर है। राहुकाल 07:23 से 08:57 तक है।

दिन और रात
दिन 05:49 – 18:20
रात 05:48 तक
तिथि
दशमी, 04:37 तक
एकादशी
नक्षत्र
पुष्य, 01:39 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण नवमी 06:24 तक
कृष्ण दशमी 04:37, 6 अक्टू॰ तक
कृष्ण एकादशी 03:04, 7 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 01:39, 6 अक्टू॰ तक
आश्लेषा 00:47, 7 अक्टू॰ तक
योग
शिव 12:21 तक
सिद्ध 09:50, 6 अक्टू॰ तक
करण
गर 06:24 तक
वणिज 17:29 तक
विष्टि (भद्रा) 04:37, 6 अक्टू॰ तक
बव 15:49, 6 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:49
सूर्यास्त
18:20
चंद्रोदय
02:26
चंद्रास्त
12:48
दिनमान
12h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:17 – 05:03
अभिजीत मुहूर्त
11:40 – 12:30

अशुभ समय

राहुकाल
07:23 – 08:57
यमगंड
10:31 – 12:05
गुलिक काल
13:39 – 15:13

5 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:49 – 07:23शुभ
काल07:23 – 08:57टालें
शुभ08:57 – 10:31शुभ
रोग10:31 – 12:05टालें
उद्वेग12:05 – 13:39टालें
चर13:39 – 15:13सामान्य
लाभ15:13 – 16:47शुभ
अमृत16:47 – 18:20शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:20 – 19:46सामान्य
रोग19:46 – 21:12टालें
काल21:12 – 22:38टालें
लाभ22:38 – 00:04शुभ
उद्वेग00:04 – 01:30टालें
शुभ01:30 – 02:56शुभ
अमृत02:56 – 04:22शुभ
चर04:22 – 05:48सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:4906:52दिन
शनि06:5207:54दिन
गुरु07:5408:57दिन
मंगल08:5710:00दिन
सूर्य10:0011:02दिन
शुक्र11:0212:05दिन
बुध12:0513:07दिन
चंद्र13:0714:10दिन
शनि14:1015:13दिन
गुरु15:1316:15दिन
मंगल16:1517:18दिन
सूर्य17:1818:20दिन
शुक्र18:2019:18रात
बुध19:1820:15रात
चंद्र20:1521:12रात
शनि21:1222:10रात
गुरु22:1023:07रात
मंगल23:0700:04रात
सूर्य00:0401:01रात
शुक्र01:0101:59रात
बुध01:5902:56रात
चंद्र02:5603:53रात
शनि03:5304:51रात
गुरु04:5105:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2309° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।