21 अक्टूबर 2026 को पर्थ का पंचांग

बुधवार, 21 अक्टूबर 2026, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (16:42 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (22:18 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 05:30 पर और सूर्यास्त 18:32 पर है। राहुकाल 12:01 से 13:39 तक है।

दिन और रात
दिन 05:30 – 18:32
रात 05:29 तक
तिथि
दशमी, 16:42 तक
एकादशी
नक्षत्र
धनिष्ठा, 22:18 तक
शतभिषा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल दशमी 16:42 तक
शुक्ल एकादशी 17:18, 22 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 23:19, 22 अक्टू॰ तक
योग
गंडअशुभ 03:03, 22 अक्टू॰ तक
वृद्धि 02:09, 23 अक्टू॰ तक
करण
गर 16:42 तक
वणिज 05:06, 22 अक्टू॰ तक
विष्टि (भद्रा) 17:18, 22 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मकर 09:30 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:30
सूर्यास्त
18:32
चंद्रोदय
13:40
चंद्रास्त
02:31
दिनमान
13h 2m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:02 – 04:46
अभिजीत मुहूर्त
11:35 – 12:27 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:01 – 13:39
यमगंड
07:08 – 08:45
गुलिक काल
10:23 – 12:01

21 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:30 – 07:08शुभ
अमृत07:08 – 08:45शुभ
काल08:45 – 10:23टालें
शुभ10:23 – 12:01शुभ
रोग12:01 – 13:39टालें
उद्वेग13:39 – 15:16टालें
चर15:16 – 16:54सामान्य
लाभ16:54 – 18:32शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:32 – 19:54टालें
शुभ19:54 – 21:16शुभ
अमृत21:16 – 22:38शुभ
चर22:38 – 00:00सामान्य
रोग00:00 – 01:23टालें
काल01:23 – 02:45टालें
लाभ02:45 – 04:07शुभ
उद्वेग04:07 – 05:29टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3006:35दिन
चंद्र06:3507:40दिन
शनि07:4008:45दिन
गुरु08:4509:51दिन
मंगल09:5110:56दिन
सूर्य10:5612:01दिन
शुक्र12:0113:06दिन
बुध13:0614:11दिन
चंद्र14:1115:16दिन
शनि15:1616:22दिन
गुरु16:2217:27दिन
मंगल17:2718:32दिन
सूर्य18:3219:27रात
शुक्र19:2720:21रात
बुध20:2121:16रात
चंद्र21:1622:11रात
शनि22:1123:06रात
गुरु23:0600:00रात
मंगल00:0000:55रात
सूर्य00:5501:50रात
शुक्र01:5002:45रात
बुध02:4503:39रात
चंद्र03:3904:34रात
शनि04:3405:29रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 नव॰ 2026कार्तिक अमावस्याअमावस्या
13 नव॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2026वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2315° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।