9 नवंबर 2026 को पर्थ का पंचांग

सोमवार, 9 नवंबर 2026, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

सोमवार, 9 नवंबर 2026 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (15:02 तक), नक्षत्र स्वाति (09:54 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:12 पर और सूर्यास्त 18:48 पर है। राहुकाल 06:54 से 08:36 तक है।

दिन और रात
दिन 05:12 – 18:48
रात 05:12 तक
तिथि
अमावस्या, 15:02 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
स्वाति, 09:54 तक
विशाखा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 नवंबर 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
अमावस्या 15:02 तक
शुक्ल प्रतिपदा 16:30, 10 नव॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 09:54 तक
विशाखा 11:49, 10 नव॰ तक
योग
आयुष्मान 05:33 तक
सौभाग्य 05:27, 10 नव॰ तक
करण
नाग 15:02 तक
किंस्तुघ्न 03:43, 10 नव॰ तक
बव 16:30, 10 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:12
सूर्यास्त
18:48
चंद्रोदय
04:42
चंद्रास्त
19:00
दिनमान
13h 35m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:49 – 04:31
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
06:54 – 08:36
यमगंड
10:18 – 12:00
गुलिक काल
13:42 – 15:24

9 नवंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:12 – 06:54शुभ
काल06:54 – 08:36टालें
शुभ08:36 – 10:18शुभ
रोग10:18 – 12:00टालें
उद्वेग12:00 – 13:42टालें
चर13:42 – 15:24सामान्य
लाभ15:24 – 17:06शुभ
अमृत17:06 – 18:48शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:48 – 20:06सामान्य
रोग20:06 – 21:24टालें
काल21:24 – 22:42टालें
लाभ22:42 – 00:00शुभ
उद्वेग00:00 – 01:18टालें
शुभ01:18 – 02:36शुभ
अमृत02:36 – 03:54शुभ
चर03:54 – 05:12सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:1206:20दिन
शनि06:2007:28दिन
गुरु07:2808:36दिन
मंगल08:3609:44दिन
सूर्य09:4410:52दिन
शुक्र10:5212:00दिन
बुध12:0013:08दिन
चंद्र13:0814:16दिन
शनि14:1615:24दिन
गुरु15:2416:32दिन
मंगल16:3217:40दिन
सूर्य17:4018:48दिन
शुक्र18:4819:40रात
बुध19:4020:32रात
चंद्र20:3221:24रात
शनि21:2422:16रात
गुरु22:1623:08रात
मंगल23:0800:00रात
सूर्य00:0000:52रात
शुक्र00:5201:44रात
बुध01:4402:36रात
चंद्र02:3603:28रात
शनि03:2804:20रात
गुरु04:2005:12रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 नव॰ 2026कार्तिक अमावस्याअमावस्या
13 नव॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2026वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
21 नव॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 नव॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 नव॰ 2026कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
28 नव॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 दिस॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2322° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।