30 सितंबर 2027 को पर्थ का पंचांग

गुरुवार, 30 सितंबर 2027, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

गुरुवार, 30 सितंबर 2027 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (10:36 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (06:30 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 05:56 पर और सूर्यास्त 18:17 पर है। राहुकाल 13:39 से 15:12 तक है।

दिन और रात
दिन 05:56 – 18:17
रात 05:55 तक
तिथि
अमावस्या, 10:36 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
हस्त, 04:41 तक
चित्रा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 सितंबर 2027 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
अमावस्या 10:36 तक
शुक्ल प्रतिपदा 08:05, 1 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
हस्त 04:41, 1 अक्टू॰ तक
चित्रा 03:19, 2 अक्टू॰ तक
योग
ब्रह्म 23:39 तक
इंद्र 20:41, 1 अक्टू॰ तक
करण
नाग 10:36 तक
किंस्तुघ्न 21:17 तक
बव 08:05, 1 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:56
सूर्यास्त
18:17
चंद्रोदय
05:37
चंद्रास्त
18:37
दिनमान
12h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:23 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:31

अशुभ समय

राहुकाल
13:39 – 15:12
यमगंड
05:56 – 07:29
गुलिक काल
09:01 – 10:34

30 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:56 – 07:29शुभ
रोग07:29 – 09:01टालें
उद्वेग09:01 – 10:34टालें
चर10:34 – 12:06सामान्य
लाभ12:06 – 13:39शुभ
अमृत13:39 – 15:12शुभ
काल15:12 – 16:44टालें
शुभ16:44 – 18:17शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:17 – 19:44शुभ
चर19:44 – 21:11सामान्य
रोग21:11 – 22:39टालें
काल22:39 – 00:06टालें
लाभ00:06 – 01:33शुभ
उद्वेग01:33 – 03:00टालें
शुभ03:00 – 04:27शुभ
अमृत04:27 – 05:55शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:5606:58दिन
मंगल06:5807:59दिन
सूर्य07:5909:01दिन
शुक्र09:0110:03दिन
बुध10:0311:05दिन
चंद्र11:0512:06दिन
शनि12:0613:08दिन
गुरु13:0814:10दिन
मंगल14:1015:12दिन
सूर्य15:1216:14दिन
शुक्र16:1417:15दिन
बुध17:1518:17दिन
चंद्र18:1719:15रात
शनि19:1520:13रात
गुरु20:1321:11रात
मंगल21:1122:10रात
सूर्य22:1023:08रात
शुक्र23:0800:06रात
बुध00:0601:04रात
चंद्र01:0402:02रात
शनि02:0203:00रात
गुरु03:0003:58रात
मंगल03:5804:56रात
सूर्य04:5605:55रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 सित॰ 2027आश्विन अमावस्याअमावस्या
3 अक्टू॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
18 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 अक्टू॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2446° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।