11 अक्टूबर 2027 को पर्थ का पंचांग

सोमवार, 11 अक्टूबर 2027, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

सोमवार, 11 अक्टूबर 2027 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (16:39 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (18:51 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 05:42 पर और सूर्यास्त 18:24 पर है। राहुकाल 07:17 से 08:53 तक है।

दिन और रात
दिन 05:42 – 18:24
रात 05:41 तक
तिथि
एकादशी, 16:39 तक
द्वादशी
नक्षत्र
धनिष्ठा, 18:51 तक
शतभिषा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 16:39 तक
शुक्ल द्वादशी 18:44, 12 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 21:25, 12 अक्टू॰ तक
योग
शूलअशुभ 18:15 तक
गंडअशुभ 18:50, 12 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 16:39 तक
बव 05:45, 12 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:42
सूर्यास्त
18:24
चंद्रोदय
14:33
चंद्रास्त
03:11
दिनमान
12h 42m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:12 – 04:57
अभिजीत मुहूर्त
11:38 – 12:29

अशुभ समय

राहुकाल
07:17 – 08:53
यमगंड
10:28 – 12:03
गुलिक काल
13:39 – 15:14

11 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:42 – 07:17शुभ
काल07:17 – 08:53टालें
शुभ08:53 – 10:28शुभ
रोग10:28 – 12:03टालें
उद्वेग12:03 – 13:39टालें
चर13:39 – 15:14सामान्य
लाभ15:14 – 16:49शुभ
अमृत16:49 – 18:24शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:24 – 19:49सामान्य
रोग19:49 – 21:14टालें
काल21:14 – 22:38टालें
लाभ22:38 – 00:03शुभ
उद्वेग00:03 – 01:27टालें
शुभ01:27 – 02:52शुभ
अमृत02:52 – 04:16शुभ
चर04:16 – 05:41सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:4206:45दिन
शनि06:4507:49दिन
गुरु07:4908:53दिन
मंगल08:5309:56दिन
सूर्य09:5611:00दिन
शुक्र11:0012:03दिन
बुध12:0313:07दिन
चंद्र13:0714:10दिन
शनि14:1015:14दिन
गुरु15:1416:17दिन
मंगल16:1717:21दिन
सूर्य17:2118:24दिन
शुक्र18:2419:21रात
बुध19:2120:17रात
चंद्र20:1721:14रात
शनि21:1422:10रात
गुरु22:1023:06रात
मंगल23:0600:03रात
सूर्य00:0300:59रात
शुक्र00:5901:55रात
बुध01:5502:52रात
चंद्र02:5203:48रात
शनि03:4804:44रात
गुरु04:4405:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
18 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 अक्टू॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या
2 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2450° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।