1 मार्च 2028 को पर्थ का पंचांग

बुधवार, 1 मार्च 2028, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

बुधवार, 1 मार्च 2028 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (04:26, 2 मार्च तक), नक्षत्र अश्विनी (20:23 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 06:06 पर और सूर्यास्त 18:51 पर है। राहुकाल 12:28 से 14:04 तक है।

दिन और रात
दिन 06:06 – 18:51
रात 06:06 तक
तिथि
पंचमी, 04:26 तक
षष्ठी
नक्षत्र
अश्विनी, 20:23 तक
भरणी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 मार्च 2028 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 04:26, 2 मार्च तक
शुक्ल षष्ठी 05:08, 3 मार्च तक
नक्षत्र
भरणी 21:49, 2 मार्च तक
योग
ब्रह्म 01:23, 2 मार्च तक
इंद्र 00:51, 3 मार्च तक
करण
बव 15:53 तक
बालव 04:26, 2 मार्च तक
कौलव 16:52, 2 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:06
सूर्यास्त
18:51
चंद्रोदय
10:17
चंद्रास्त
21:02
दिनमान
12h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:36 – 05:21
अभिजीत मुहूर्त
12:03 – 12:54 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:28 – 14:04
यमगंड
07:41 – 09:17
गुलिक काल
10:52 – 12:28

1 मार्च 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:06 – 07:41शुभ
अमृत07:41 – 09:17शुभ
काल09:17 – 10:52टालें
शुभ10:52 – 12:28शुभ
रोग12:28 – 14:04टालें
उद्वेग14:04 – 15:39टालें
चर15:39 – 17:15सामान्य
लाभ17:15 – 18:51शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:51 – 20:15टालें
शुभ20:15 – 21:40शुभ
अमृत21:40 – 23:04शुभ
चर23:04 – 00:28सामान्य
रोग00:28 – 01:53टालें
काल01:53 – 03:17टालें
लाभ03:17 – 04:42शुभ
उद्वेग04:42 – 06:06टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:0607:09दिन
चंद्र07:0908:13दिन
शनि08:1309:17दिन
गुरु09:1710:21दिन
मंगल10:2111:24दिन
सूर्य11:2412:28दिन
शुक्र12:2813:32दिन
बुध13:3214:36दिन
चंद्र14:3615:39दिन
शनि15:3916:43दिन
गुरु16:4317:47दिन
मंगल17:4718:51दिन
सूर्य18:5119:47रात
शुक्र19:4720:43रात
बुध20:4321:40रात
चंद्र21:4022:36रात
शनि22:3623:32रात
गुरु23:3200:28रात
मंगल00:2801:25रात
सूर्य01:2502:21रात
शुक्र02:2103:17रात
बुध03:1704:14रात
चंद्र04:1405:10रात
शनि05:1006:06रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 मार्च 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 मार्च 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 मार्च 2028फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 मार्च 2028मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 मार्च 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 मार्च 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 मार्च 2028चैत्र अमावस्याअमावस्या
30 मार्च 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2505° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।