2 मार्च 2028 को पर्थ का पंचांग

गुरुवार, 2 मार्च 2028, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

गुरुवार, 2 मार्च 2028 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (05:08, 3 मार्च तक), नक्षत्र भरणी (21:49 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 06:06 पर और सूर्यास्त 18:49 पर है। राहुकाल 14:03 से 15:39 तक है।

दिन और रात
दिन 06:06 – 18:49
रात 06:07 तक
तिथि
षष्ठी, 05:08 तक
नक्षत्र
भरणी, 21:49 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 मार्च 2028 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 05:08, 3 मार्च तक
शुक्ल सप्तमी 05:14, 4 मार्च तक
नक्षत्र
भरणी 21:49 तक
कृत्तिका 22:41, 3 मार्च तक
योग
इंद्र 00:51, 3 मार्च तक
वैधृतिअशुभ 23:53, 3 मार्च तक
करण
कौलव 16:52 तक
तैतिल 05:08, 3 मार्च तक
गर 17:16, 3 मार्च तक
चंद्र राशि
मेष 04:05, 3 मार्च तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:06
सूर्यास्त
18:49
चंद्रोदय
11:16
चंद्रास्त
21:40
दिनमान
12h 43m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:36 – 05:21
अभिजीत मुहूर्त
12:02 – 12:53

अशुभ समय

राहुकाल
14:03 – 15:39
यमगंड
06:06 – 07:42
गुलिक काल
09:17 – 10:52

2 मार्च 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:06 – 07:42शुभ
रोग07:42 – 09:17टालें
उद्वेग09:17 – 10:52टालें
चर10:52 – 12:28सामान्य
लाभ12:28 – 14:03शुभ
अमृत14:03 – 15:39शुभ
काल15:39 – 17:14टालें
शुभ17:14 – 18:49शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:49 – 20:14शुभ
चर20:14 – 21:39सामान्य
रोग21:39 – 23:04टालें
काल23:04 – 00:28टालें
लाभ00:28 – 01:53शुभ
उद्वेग01:53 – 03:18टालें
शुभ03:18 – 04:42शुभ
अमृत04:42 – 06:07शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0607:10दिन
मंगल07:1008:14दिन
सूर्य08:1409:17दिन
शुक्र09:1710:21दिन
बुध10:2111:24दिन
चंद्र11:2412:28दिन
शनि12:2813:31दिन
गुरु13:3114:35दिन
मंगल14:3515:39दिन
सूर्य15:3916:42दिन
शुक्र16:4217:46दिन
बुध17:4618:49दिन
चंद्र18:4919:46रात
शनि19:4620:42रात
गुरु20:4221:39रात
मंगल21:3922:35रात
सूर्य22:3523:32रात
शुक्र23:3200:28रात
बुध00:2801:25रात
चंद्र01:2502:21रात
शनि02:2103:18रात
गुरु03:1804:14रात
मंगल04:1405:11रात
सूर्य05:1106:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 मार्च 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 मार्च 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 मार्च 2028फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 मार्च 2028मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 मार्च 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 मार्च 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 मार्च 2028चैत्र अमावस्याअमावस्या
30 मार्च 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2505° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।