24 अगस्त 2028 को पर्थ का पंचांग

गुरुवार, 24 अगस्त 2028, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

गुरुवार, 24 अगस्त 2028 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (01:40, 25 अग॰ तक), नक्षत्र चित्रा (23:45 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 06:42 पर और सूर्यास्त 17:55 पर है। राहुकाल 13:43 से 15:07 तक है।

दिन और रात
दिन 06:42 – 17:55
रात 06:41 तक
तिथि
पंचमी, 01:40 तक
षष्ठी
नक्षत्र
चित्रा, 23:45 तक
स्वाति
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 अगस्त 2028 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 01:40, 25 अग॰ तक
शुक्ल षष्ठी 23:30, 25 अग॰ तक
नक्षत्र
चित्रा 23:45 तक
स्वाति 22:19, 25 अग॰ तक
योग
शुभ 11:43 तक
शुक्ल 08:33, 25 अग॰ तक
करण
बव 14:58 तक
बालव 01:40, 25 अग॰ तक
कौलव 12:30, 25 अग॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 12:41 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:42
सूर्यास्त
17:55
चंद्रोदय
08:44
चंद्रास्त
22:29
दिनमान
11h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:00 – 05:51
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:41

अशुभ समय

राहुकाल
13:43 – 15:07
यमगंड
06:42 – 08:06
गुलिक काल
09:30 – 10:55

24 अगस्त 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:42 – 08:06शुभ
रोग08:06 – 09:30टालें
उद्वेग09:30 – 10:55टालें
चर10:55 – 12:19सामान्य
लाभ12:19 – 13:43शुभ
अमृत13:43 – 15:07शुभ
काल15:07 – 16:31टालें
शुभ16:31 – 17:55शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:55 – 19:31शुभ
चर19:31 – 21:06सामान्य
रोग21:06 – 22:42टालें
काल22:42 – 00:18टालें
लाभ00:18 – 01:54शुभ
उद्वेग01:54 – 03:30टालें
शुभ03:30 – 05:05शुभ
अमृत05:05 – 06:41शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:4207:38दिन
मंगल07:3808:34दिन
सूर्य08:3409:30दिन
शुक्र09:3010:26दिन
बुध10:2611:23दिन
चंद्र11:2312:19दिन
शनि12:1913:15दिन
गुरु13:1514:11दिन
मंगल14:1115:07दिन
सूर्य15:0716:03दिन
शुक्र16:0316:59दिन
बुध16:5917:55दिन
चंद्र17:5518:59रात
शनि18:5920:03रात
गुरु20:0321:06रात
मंगल21:0622:10रात
सूर्य22:1023:14रात
शुक्र23:1400:18रात
बुध00:1801:22रात
चंद्र01:2202:26रात
शनि02:2603:30रात
गुरु03:3004:33रात
मंगल04:3305:37रात
सूर्य05:3706:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 अग॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 सित॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 सित॰ 2028भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
8 सित॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 सित॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 सित॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 सित॰ 2028कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सित॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 सित॰ 2028आश्विन अमावस्याअमावस्या
22 सित॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2572° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।