11 सितंबर 2028 को पर्थ का पंचांग

सोमवार, 11 सितंबर 2028, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

सोमवार, 11 सितंबर 2028 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (20:40 तक), नक्षत्र रोहिणी (04:41, 12 सित॰ तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 06:20 पर और सूर्यास्त 18:06 पर है। राहुकाल 07:48 से 09:16 तक है।

दिन और रात
दिन 06:20 – 18:06
रात 06:19 तक
तिथि
सप्तमी, 20:40 तक
अष्टमी
नक्षत्र
रोहिणी, 04:41 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 सितंबर 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 20:40 तक
कृष्ण अष्टमी 20:40, 12 सित॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 04:41, 12 सित॰ तक
मृगशिरा 05:06, 13 सित॰ तक
योग
हर्षण 07:40 तक
वज्रअशुभ 06:56, 12 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 08:24 तक
बव 20:40 तक
बालव 08:45, 12 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:20
सूर्यास्त
18:06
चंद्रोदय
00:00
चंद्रास्त
10:06
दिनमान
11h 46m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:42 – 05:31
अभिजीत मुहूर्त
11:49 – 12:36

अशुभ समय

राहुकाल
07:48 – 09:16
यमगंड
10:45 – 12:13
गुलिक काल
13:41 – 15:09

11 सितंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:20 – 07:48शुभ
काल07:48 – 09:16टालें
शुभ09:16 – 10:45शुभ
रोग10:45 – 12:13टालें
उद्वेग12:13 – 13:41टालें
चर13:41 – 15:09सामान्य
लाभ15:09 – 16:38शुभ
अमृत16:38 – 18:06शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:06 – 19:37सामान्य
रोग19:37 – 21:09टालें
काल21:09 – 22:41टालें
लाभ22:41 – 00:12शुभ
उद्वेग00:12 – 01:44टालें
शुभ01:44 – 03:15शुभ
अमृत03:15 – 04:47शुभ
चर04:47 – 06:19सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:2007:19दिन
शनि07:1908:18दिन
गुरु08:1809:16दिन
मंगल09:1610:15दिन
सूर्य10:1511:14दिन
शुक्र11:1412:13दिन
बुध12:1313:12दिन
चंद्र13:1214:10दिन
शनि14:1015:09दिन
गुरु15:0916:08दिन
मंगल16:0817:07दिन
सूर्य17:0718:06दिन
शुक्र18:0619:07रात
बुध19:0720:08रात
चंद्र20:0821:09रात
शनि21:0922:10रात
गुरु22:1023:11रात
मंगल23:1100:12रात
सूर्य00:1201:13रात
शुक्र01:1302:14रात
बुध02:1403:15रात
चंद्र03:1504:16रात
शनि04:1605:18रात
गुरु05:1806:19रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 सित॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 सित॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 सित॰ 2028कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सित॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 सित॰ 2028आश्विन अमावस्याअमावस्या
22 सित॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 सित॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 अक्टू॰ 2028आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
8 अक्टू॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2579° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।