14 अक्टूबर 2028 को पर्थ का पंचांग

शनिवार, 14 अक्टूबर 2028, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

शनिवार, 14 अक्टूबर 2028 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (00:58, 15 अक्टू॰ तक), नक्षत्र आश्लेषा (09:09 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 05:37 पर और सूर्यास्त 18:27 पर है। राहुकाल 08:50 से 10:26 तक है।

दिन और रात
दिन 05:37 – 18:27
रात 05:36 तक
तिथि
एकादशी, 00:58 तक
द्वादशी
नक्षत्र
आश्लेषा, 09:09 तक
मघा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 अक्टूबर 2028 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 00:58, 15 अक्टू॰ तक
कृष्ण द्वादशी 21:47, 15 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मघा 07:02, 15 अक्टू॰ तक
योग
शुभ 00:07, 15 अक्टू॰ तक
शुक्ल 20:21, 15 अक्टू॰ तक
करण
बव 14:25 तक
बालव 00:58, 15 अक्टू॰ तक
कौलव 11:25, 15 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 09:09 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:37
सूर्यास्त
18:27
चंद्रोदय
02:44
चंद्रास्त
14:12
दिनमान
12h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:08 – 04:53
अभिजीत मुहूर्त
11:37 – 12:28

अशुभ समय

राहुकाल
08:50 – 10:26
यमगंड
13:38 – 15:15
गुलिक काल
05:37 – 07:14

14 अक्टूबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:37 – 07:14टालें
शुभ07:14 – 08:50शुभ
रोग08:50 – 10:26टालें
उद्वेग10:26 – 12:02टालें
चर12:02 – 13:38सामान्य
लाभ13:38 – 15:15शुभ
अमृत15:15 – 16:51शुभ
काल16:51 – 18:27टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:27 – 19:51शुभ
उद्वेग19:51 – 21:14टालें
शुभ21:14 – 22:38शुभ
अमृत22:38 – 00:02शुभ
चर00:02 – 01:25सामान्य
रोग01:25 – 02:49टालें
काल02:49 – 04:13टालें
लाभ04:13 – 05:36शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:3706:42दिन
गुरु06:4207:46दिन
मंगल07:4608:50दिन
सूर्य08:5009:54दिन
शुक्र09:5410:58दिन
बुध10:5812:02दिन
चंद्र12:0213:06दिन
शनि13:0614:11दिन
गुरु14:1115:15दिन
मंगल15:1516:19दिन
सूर्य16:1917:23दिन
शुक्र17:2318:27दिन
बुध18:2719:23रात
चंद्र19:2320:19रात
शनि20:1921:14रात
गुरु21:1422:10रात
मंगल22:1023:06रात
सूर्य23:0600:02रात
शुक्र00:0200:57रात
बुध00:5701:53रात
चंद्र01:5302:49रात
शनि02:4903:45रात
गुरु03:4504:40रात
मंगल04:4005:36रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 अक्टू॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अक्टू॰ 2028तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2028कार्तिक अमावस्याअमावस्या
21 अक्टू॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 अक्टू॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 नव॰ 2028कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
6 नव॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 नव॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2592° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।